RBI rejects Tata Sons CIC de-registration application, increasing pressure to list on stock exchanges

RBI ने CIC से डी-रजिस्ट्रेशन खारिज किया, Tata Sons पर लिस्टिंग का दबाव बढ़ा

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मुंबई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने Tata Sons Private Ltd की Core Investment Company यानी CIC के तौर पर डी-रजिस्ट्रेशन की अर्जी खारिज कर दी है। इसके बाद Tata Sons को शेयर बाजार में लिस्टिंग की तैयारी करनी पड़ सकती है। डी-रजिस्ट्रेशन नहीं होने का मतलब है कि Tata Sons Non-Banking Finance Companies के Upper Layer यानी NBFC-UL वर्ग में बना रहेगा, जहां लिस्टिंग की जरूरत होती है।

RBI की 6 अगस्त को जारी NBFC-UL सूची में कुल 17 NBFC शामिल थे, जिनमें Tata Sons Private Ltd भी था। उस समय केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया था कि Tata Sons को सूची में शामिल करना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के अंतिम नतीजे पर निर्भर नहीं है और आवेदन की जांच जारी है। अब आवेदन खारिज होने के बाद Tata Sons के लिए लिस्टिंग का मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब Tata Trusts के जरिए Noel Tata Tata Sons पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, N Chandrasekaran ने अगस्त के मध्य में मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने के बाद Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया है।

Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर उसके प्रमुख शेयरधारकों के बीच मतभेद सामने आए हैं। Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata समूह की होल्डिंग कंपनी को निजी बनाए रखने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, Tata Trusts के पास Tata Sons के करीब 66 प्रतिशत शेयर हैं। लिस्टिंग होने पर होल्डिंग कंपनी पर नियामकीय और बाजार स्तर की निगरानी बढ़ जाएगी।

दूसरी ओर, Shapoorji Pallonji यानी SP Group, जिसकी Tata Sons में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है, शेयर बाजार में लिस्टिंग के पक्ष में है। SP Group का मानना है कि लिस्टिंग से उसकी हिस्सेदारी में तरलता यानी Liquidity आएगी और वह अपनी हिस्सेदारी का मूल्य अनलॉक कर सकेगा।

SP Group और Noel Tata के बीच हिस्सेदारी को मॉनेटाइज करने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा भी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें Tata Sons की हिस्सेदारी की बायबैक या SP Group की Tata Group की सूचीबद्ध कंपनियों में मौजूद हिस्सेदारी की पेशकश जैसे विकल्प शामिल हैं।

Tata Sons इससे पहले भी RBI की अक्टूबर 2022 में जारी पहली NBFC-UL सूची में शामिल था। NBFC-UL नियमों के अनुसार, जिस संस्था का नाम इस सूची में आता है, उसे सूची में शामिल होने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना होता है। इस नियम के कारण RBI के ताजा फैसले के बाद Tata Sons के सामने लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बढ़ गया है।

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