investors will increasingly move towards institutional products for F&O trades

निवेशक F&O ट्रेड के लिए इंस्टीट्यूशनल प्रोडक्ट्स की ओर करेंगे रुख: श्रीराम कृष्णन

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भारत सरकार और बाजार नियामक सेबी की ओर से रिटेल निवेशकों के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O कारोबार पर सख्ती बढ़ाए जाने के बीच IPO लाने जा रहे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE का मानना है कि लंबी अवधि में निवेशकों का रुझान सीधे सट्टेबाजी वाले F&O कारोबार से हटकर स्पेशलाइज्ड इंस्टीट्यूशनल प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ सकता है। NSE की आय में करीब दो तिहाई हिस्सेदारी इसी सेगमेंट से आती है।

NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन ने शनिवार को एक प्रेस कार्यक्रम में कहा कि सेबी धीरे धीरे निवेशकों को F&O बाजार में सीधे कारोबार करने के बजाय SIF के जरिए निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। उनके मुताबिक सीधे F&O कारोबार में जोखिम उठाने के बजाय संस्थागत माध्यम से बाजार में भागीदारी निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

SIF क्या है: SIF यानी Systematic Investment Funds निवेश की एक ऐसी श्रेणी है जिसे बाजार नियामक ने पेश किया है। इसके जरिए निवेशक डेरिवेटिव जैसे उन्नत बाजार साधनों में भाग ले सकते हैं। SIF में न्यूनतम 10 लाख रुपए का निवेश जरूरी है।

श्रीराम कृष्णन ने कहा कि जिस तरह म्यूचुअल फंड उद्योग ने कैश इक्विटी बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और सुरक्षा का ढांचा तैयार करने में भूमिका निभाई, उसी तरह SIF भी F&O बाजार में निवेशकों को एक संस्थागत माध्यम उपलब्ध करा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सेबी लंबे समय से निवेशकों की शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता दे रहा है। फिलहाल बड़ी संख्या में निवेशक सीधे F&O में कारोबार कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में धीरे धीरे निवेशकों के संस्थागत प्रोडक्ट्स की ओर जाने की संभावना है। उनके मुताबिक F&O में निवेश के लिए यह बदलाव सकारात्मक हो सकता है।

NSE की आय में बढ़ेगा विविधीकरण: NSE की लंबी अवधि की रणनीति पर कृष्णन ने कहा कि एक्सचेंज नए और अलग तरह के प्रोडक्ट्स लगातार पेश करता रहेगा। उन्होंने Electronic Gold Receipts यानी EGR और Electricity Futures जैसे उत्पादों का उदाहरण दिया।

उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में NSE की आय में स्वाभाविक रूप से काफी विविधता आएगी। ऐसे में मौजूदा समय में इंडेक्स ऑप्शंस पर जो ज्यादा ध्यान है, वह लंबी अवधि में कम हो सकता है।

NSE IPO में घटा इश्यू साइज: NSE अगले सप्ताह 22,569 करोड़ रुपए के ऊपरी प्राइस बैंड वाले IPO के जरिए शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है। यह पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS होगा। इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाली रकम NSE के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी। NSE ने शुरुआती ड्राफ्ट दस्तावेजों में करीब 30,000 करोड़ रुपए के IPO का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाद में इश्यू का आकार करीब 15 प्रतिशत घटा दिया गया।

श्रीराम कृष्णन के मुताबिक जब NSE के मौजूदा शेयरधारकों के साथ IPO में हिस्सेदारी बेचने को लेकर शुरुआती बातचीत हुई थी, तब करीब 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध थी। हालांकि बाद में कुछ शेयरधारकों को लगा कि NSE के शेयर का मूल्य प्रस्तावित IPO कीमत से काफी अधिक है। इसलिए कुछ शेयरधारकों ने OFS से पीछे हटने का फैसला किया और अपने शेयर बेचने से इनकार कर दिया।

अगले दशक में 6,000 कंपनियों की लिस्टिंग का लक्ष्य: NSE को उम्मीद है कि उसके प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या अगले दशक में लगभग दोगुनी होकर करीब 6,000 तक पहुंच सकती है। इससे एक्सचेंज के कारोबार और आय के आधार में और विस्तार होने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर NSE का फोकस लंबे समय में केवल इंडेक्स ऑप्शंस पर निर्भर रहने के बजाय नए उत्पादों और संस्थागत निवेश माध्यमों के जरिए आय में विविधता बढ़ाने पर है। F&O कारोबार में रिटेल निवेशकों की सीधी भागीदारी घटने की स्थिति में SIF जैसे उत्पाद NSE के लिए नए निवेशक आधार और कारोबार के अवसर तैयार कर सकते हैं।

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