मुंबई। सोने ने अगस्त की शुरुआत में जनवरी के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी दर्ज करने के बाद इस सप्ताह भी मजबूती दिखाई और करीब 4450 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गया। हालांकि मध्य पूर्व संकट का समाधान नहीं होने और ऊंचे तेल भाव की चिंता के कारण सोने में मुनाफावसूली हुई और सप्ताह का अंत करीब 4400 डॉलर के आसपास हुआ।
अमेरिका के जुलाई के महंगाई आंकड़ों ने सोने को सहारा दिया। जुलाई में सालाना सीपीआई महंगाई जून के 3.5 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत रही, जबकि मासिक सीपीआई 0.1 प्रतिशत बढ़ा। कोर सीपीआई में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद जुलाई का उत्पादक मूल्य सूचकांक भी जून के 5.5 प्रतिशत से घटकर 4.7 प्रतिशत रह गया। आंकड़ों के बाद सितंबर में फेड की 25 बेसिस प्वाइंट दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 45 प्रतिशत से घटकर 35 प्रतिशत से नीचे आ गई।
हालांकि फेड की नीति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। बाजार की नजर अब जुलाई की फेड बैठक के मिनट्स पर है। अगर इसमें सितंबर में दर बढ़ाने का संकेत मिलता है तो डॉलर मजबूत होकर सोने पर दबाव डाल सकता है। इसके विपरीत दर बढ़ोतरी के लिए ऊंची सीमा का संकेत मिलने पर सोने में नई तेजी आ सकती है।
तकनीकी स्तर पर 4390 से 4400 डॉलर का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट है। इसके ऊपर टिकाव रहने पर 4450 डॉलर और फिर 4500 से 4505 डॉलर का क्षेत्र बड़ी चुनौती होगा। 4505 डॉलर के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट मिलने पर अगला लक्ष्य 4680 डॉलर हो सकता है। नीचे 4300 से 4295 डॉलर और फिर 4175 से 4150 डॉलर अहम सपोर्ट हैं।
विश्लेषकों के अनुसार व्यापक माहौल सोने के पक्ष में है, लेकिन तेजी की अगली बड़ी चाल के लिए अमेरिकी यील्ड और डॉलर में और कमजोरी तथा गोल्ड ईटीएफ में मजबूत निवेश मांग जरूरी होगी।



