मुंबई। बिटकॉइन इस सप्ताह 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 62900 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा है। हालांकि कीमत में स्थिरता के संकेत उभर रहे हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी तनाव, ऊंची तेल कीमतें और बढ़ता वॉर रिस्क प्रीमियम निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर दबाव डाल रहे हैं। इससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है और बिटकॉइन की तेजी सीमित हो रही है।
संस्थागत मांग भी फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। गुरुवार तक अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में 332.02 मिलियन डॉलर का शुद्ध आउटफ्लो दर्ज हुआ। यह संकेत देता है कि बड़े निवेशक फिलहाल नई पोजीशन लेने में सावधानी बरत रहे हैं।
अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों से फेड को सितंबर में ब्याज दर स्थिर रखने की गुंजाइश मिली है। जुलाई में सीपीआई महंगाई 3.4 प्रतिशत रही, जबकि पीपीआई 4.7 प्रतिशत पर आ गया। साल के अंत तक फेड की दर बढ़ोतरी की संभावना भी करीब 85 प्रतिशत से घटकर 65 प्रतिशत से कुछ अधिक रह गई है। हालांकि ऊंचे तेल भाव और भू राजनीतिक जोखिम डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग को मजबूत रख सकते हैं।
तकनीकी स्तर पर 63000 से 65000 डॉलर की रेंज बिटकॉइन के लिए निर्णायक बनी हुई है। 65520 डॉलर के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट मिलने पर 78490 डॉलर तक रिकवरी की संभावना बन सकती है। वहीं 200 सप्ताह की एसएमए 63998 डॉलर के आसपास अहम स्तर है। इसके नीचे साप्ताहिक क्लोजिंग होने पर 60000 डॉलर तक कमजोरी का जोखिम है।
विशेषज्ञ साइमन पीटर मसाबनी के मुताबिक अगस्त के अंत तक बिटकॉइन 68000 से 72000 डॉलर की रेंज में पहुंच सकता है, जिसका बेस केस करीब 70000 डॉलर है। हालांकि इसके लिए 67000 डॉलर के ऊपर वापसी जरूरी होगी। दूसरी ओर 61000 से 62000 डॉलर के नीचे गिरावट इस तेजी के अनुमान को टाल सकती है।



