अंतरराष्ट्रीय बैंक ANZ ने सोने पर अपना दूसरा तिमाही मूल्य लक्ष्य बढ़ाते हुए 5,800 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। इससे पहले बैंक का लक्ष्य 5,400 डॉलर था। बैंक के अनुसार हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की तेजी अभी थमी नहीं है।
अपनी ताजा रिपोर्ट में एएनजेड के कमोडिटी विश्लेषकों ने कहा कि सोना फिलहाल 5,000 डॉलर के आसपास स्थिर होता दिख रहा है, लेकिन यह स्तर लंबे समय तक बाधा नहीं बनेगा। पिछले महीने 5,600 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से आई तेज गिरावट ने कुछ निवेशकों को 1980 और 2011 जैसी ऐतिहासिक गिरावटों की आशंका से चिंतित किया है। हालांकि बैंक का मानना है कि मौजूदा हालात पहले जैसे नहीं हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व से कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। घटते महंगाई दबावों के बीच दिसंबर तक तीसरी कटौती की संभावना भी बाजार में जोड़ी जा रही है। एएनजेड का अनुमान है कि मार्च और जून में 25-25 आधार अंकों की दो कटौतियां होंगी, जिससे वास्तविक ब्याज दरें नीचे आएंगी और सोने में निवेश को समर्थन मिलेगा।
बैंक ने कहा कि भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएं बनी रहेंगी। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावना भी बाजार के लिए जोखिम बनी हुई है। साथ ही फेड की विश्वसनीयता को लेकर उठते सवाल भी निवेशकों को वास्तविक परिसंपत्तियों, खासकर सोने की ओर आकर्षित कर सकते हैं।
एएनजेड के अनुसार वैश्विक वित्तीय व्यवस्था एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी, जिसे कभी जोखिम-मुक्त परिसंपत्ति माना जाता था, बढ़ते कर्ज, फेड की स्वतंत्रता पर चिंताओं और प्रतिबंधों के जोखिम के कारण भरोसे की चुनौती झेल रहा है। लंबी अवधि की यील्ड पर बढ़ते प्रीमियम से यह रुझान स्पष्ट है।
बैंक का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सोना एक संक्रमणकालीन और स्थिरता प्रदान करने वाली परिसंपत्ति के रूप में उभरता है। जब तक भू-राजनीतिक स्थिरता, अमेरिका की राजकोषीय समस्याओं का समाधान और फेड की साख बहाल नहीं होती, तब तक सोने में रणनीतिक निवेश प्रासंगिक रहेगा।
मांग के विभिन्न पहलुओं पर एएनजेड ने कहा कि 2026 तक केंद्रीय बैंकों की खरीद मजबूत रहने का अनुमान है, लेकिन इस साल निवेश मांग प्रमुख भूमिका निभाएगी। गोल्ड-समर्थित ईटीएफ में निवेश बढ़ने की संभावना है और कुल होल्डिंग 4,800 टन से ऊपर जा सकती है। पश्चिमी बाजारों के साथ-साथ चीन और भारत जैसे उभरते बाजारों से भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिनकी वैश्विक ईटीएफ होल्डिंग में हिस्सेदारी मौजूदा 10% से आगे बढ़ सकती है।
बैंक ने यह भी कहा कि यदि भू-राजनीतिक या राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं और निवेशकों का रुख इक्विटी व बॉन्ड से सोने की ओर होता है, तो कीमतों में और तेज उछाल संभव है। फिलहाल गोल्ड ईटीएफ का एसेट अंडर मैनेजमेंट कुल इक्विटी और बॉन्ड होल्डिंग का 3% से भी कम है, ऐसे में मामूली पोर्टफोलियो बदलाव भी सोने की कीमतों पर बड़ा सकारात्मक असर डाल सकते हैं।
चांदी पर भी एएनजेड का रुख सकारात्मक है, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक इसकी अधिक अस्थिरता के कारण इस साल यह सोने से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। उनका कहना है कि चांदी की चाल सोने पर निर्भर रहेगी और औद्योगिक मांग ऊंची कीमतों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर सकती है, जिससे इसका दायरा अपेक्षाकृत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला रहेगा।



