साल 2026 में कीमती धातुओं का बाजार तेज उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) से प्रभावित रहेगा। यह कहना है HSBC के चीफ प्रेशियस मेटल्स एनालिस्ट James Steel का। उन्होंने CNBC को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि फेडरल रिजर्व की नीतियां और अमेरिकी डॉलर में एक्सपोजर सोने की मांग को दिशा देते रहेंगे।
स्टील ने कहा कि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.30% से घटकर 4.00% तक आने के बावजूद सोने में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी है। उनके मुताबिक 2022 से पहले 10-वर्षीय वास्तविक ब्याज दर (यील्ड माइनस महंगाई) और सोने के बीच मजबूत विपरीत संबंध था, जो ब्रेटन वुड्स व्यवस्था के अंत के बाद से स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। लेकिन हाल के वर्षों में यह संबंध कमजोर पड़ गया है।
उन्होंने कहा कि अब सोना वास्तविक दरों, खासकर 10-वर्षीय यील्ड, के प्रति पहले जितना संवेदनशील नहीं है। इसके पीछे खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, भू-राजनीतिक जोखिम और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद अहम कारण हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में यह संबंध फिर मजबूत हो सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं दिखता।
फेड की स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों के संदर्भ में स्टील ने कहा कि जब तक फेड अपनी स्वतंत्रता बनाए रखता है, बाजार संतुलित रहेगा। लेकिन केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह का खतरा सोने की कीमतों को समर्थन दे सकता है।
डॉलर के ‘डिबेसमेंट हेज’ के रूप में सोने की भूमिका पर उन्होंने कहा कि एचएसबीसी का मानना है कि डॉलर लंबे समय तक दुनिया की आरक्षित मुद्रा बना रहेगा। हालांकि कई केंद्रीय बैंक अपने डॉलर भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं। उनके अनुसार 2022 के बाद से केंद्रीय बैंकों की सोना खरीद पिछले दशक के औसत से दो से तीन गुना तक अधिक रही है।
स्टील ने कहा कि हाल के वर्षों में सोने ने उल्लेखनीय तेजी दर्ज की है। 1980 में 850 डॉलर का पुराना उच्च स्तर था, जो मुद्रास्फीति समायोजित आधार पर आज के मूल्यों में करीब 3,400 डॉलर बैठता है। अप्रैल में सोना इस स्तर से ऊपर निकल चुका है और लगातार नए उच्च स्तर बना चुका है। उनके मुताबिक हाल की सुस्ती से तेजी का रुख खत्म नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने आगाह किया कि जनवरी में आई पराबोलिक तेजी के बाद बाजार में नया पैसा आया है, जिससे उतार-चढ़ाव बढ़ना स्वाभाविक है। “सुरक्षित निवेश होने का मतलब यह नहीं कि सोना अस्थिर नहीं होगा। 2026 में सोने के लिए सबसे अहम शब्द रहेगा—वोलैटिलिटी।”



