काल चिंतन Archives - Moltol India https://moltolindia.com/contemplation-of-time/ Business News Today: Read the latest Business News on the Indian Stock Market, Commodity Market, Currency News, Global Market, Upcoming IPOs, Indian Economy, and more. Get Stock and Share market news, Finance News, Agri Commodity Market, Non-Agri Commodity Market, Sensex, Nifty Live, Commodity Market, IPO news, economy news, personal finance news, Drone News, today only at Moltol India Sat, 12 Oct 2024 17:57:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://moltolindia.com/wp-content/uploads/2025/09/cropped-Moltol-New-Logo-Munafe-ki-baat-32x32.jpeg काल चिंतन Archives - Moltol India https://moltolindia.com/contemplation-of-time/ 32 32 राशि के अनुसार करें नौकरी और कारोबार..हो जाएंगे वारे-न्‍यारे https://moltolindia.com/do-job-and-business-according-to-your-zodiac-sign-you-will-become-unique/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/do-job-and-business-according-to-your-zodiac-sign-you-will-become-unique/contemplation-of-time/#respond Sat, 12 Oct 2024 17:50:48 +0000 https://moltolindia.com/?p=6767 Spread the loveमेष: मेष राशि के स्वामी मंगल देव हैं। मंगल को पृथ्वी का पुत्र माना जाता है। इसका रक्त […]

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मेष: मेष राशि के स्वामी मंगल देव हैं। मंगल को पृथ्वी का पुत्र माना जाता है। इसका रक्त वर्ण है। जमीन, मकान, खेती एवं उससे जुड़े उपकरणों, दवाइयों के उपकरणों, वाहन विक्रय, खनिज, कोयला में निवेश करने वाले लोगों को मंगल बहुत लाभ देता है।इस राशि के लोगों को किसी भी प्रकार के जोखिम, केमिकल, चमड़े, लोहे से संबंधित कार्य में निवेश करने से बचना चाहिए। जन्मपत्रिका में मंगल-चंद्र की युति हो तो व्यक्तिअति धनवान होता है।

वृषभ: इस राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र चंचल ग्रह है तथा चंद्रमा इस राशि में उच्च का होता है। इन लोगों को अनाज, कपड़ा, चांदी, शकर, चावल, सौन्दर्य सामग्री, इत्र, दूध एवं दूध से बने पदार्थ, प्लास्टिक, खाद्य तेल, ऑटो पार्टस, वाहन में लगने वाली सामग्री, कपड़े से संबंधीत शेयर एवं रत्नों में निवेश करने से लाभ प्राप्त होता है।जमीन, खनिज, कोयला, रत्न, सोना, चांदी, स्टील, कोयला, शिक्षण संस्थान, चमड़ा, लकड़ी, वाहन, आधुनिक यंत्र, औषधियों, विदेशी दवाइयों आदि में निवेश से बचना चाहिए।

मिथुन: इस राशि का स्वामी बुध है। बुध चंद्र को अपना शत्रु मानता है। बुध व्यापार करने वाले लोगों को लाभ देने वाला ग्रह है। इस राशि के जातकों को सोने में निवेश लाभदायी रहता है।इसके अलावा कागज, लकड़ी, पीतल, गेंहू, दालें, कपड़ा, स्टील, प्लास्टिक, तेल, सौन्दर्य सामग्री, सीमेंट, खनिज पदार्थ, पशु, पूजन सामग्री, वाद्य यंत्र आदि का व्यापार या इन चीजोंसे संबंधित निवेश लाभ देता है।

कर्क: कर्क राशि का स्वामी स्वयं चन्द्रमा है। इस राशि के लोग व्यवसाय के साथ नौकरी में भी सफल होते हैं। इन लोगों को चांदी, चावल, शकर एवं कपड़ा उत्पाद करने वाली कंपनियों के शेयर, प्लास्टिक, अनाज, लकड़ी, केबल, तार, फिल्मों, खाद्य सामग्रियों, आधुनिक उपकरण, बच्चों के खिलोने, फायनेंस कंपनियों में निवेश करना लाभदायी होता है। वर्तमान में शेयर एवं वादा बाजार में निवेश से बिल्कुल नहीं करें। जमीन, प्लाट, मकान, दुकान, तेल, सोना, पीतल, वाहन, दूध से बने पदार्थ, पशु, रत्न, फर्टीलाइजर्स, सीमेंट, औषधियों एवं विदेशी दवाई कंपनियों में निवेश सावधानी से करना चाहिए।

सिंह: इस राशि का स्वामी सूर्य चंद्रमा का मित्र है। यह लोग स्वयं का कार्य या व्यापार में सफल होते हैं। सामान्यत: इन लोगों को नौकरी पसंद नहीं होती है। इन्हें सोना, गेंहू, कपड़ा, औषधियों, रत्नों, सौन्दर्य सामग्री, इत्र, सेंट, शेयर एवं जमीन जायदाद में निवेश से लाभ होता है। इन लोगों को तकनीकी उपकरण,वाहन, सौदंर्य सामग्री, फिल्म्स,प्लास्टिक, केबल तार, इलेक्ट्रॉनिक्स,कागज, खाद्य पदार्थ, लकड़ी एवं उससे बने उपकरण, सेना में सप्लाई करने में भी यह लाभ प्राप्त होता है।इस राशि के जातकों को किसी भी निवेश लाभ-हानि बराबर होती है। पूर्णत: हानि से यह सदैव बचे रहते हैं।

कन्या: इस राशि का स्वामी बुध है। जो चंद्रमा से शत्रुता रखता है। इन लोगों को शिक्षण संस्थान, सोना, औषधियों, केमिकल, फर्टीलाइजर्स, चमड़े से बने सामान,खेती, खेती के उपकरणों के कार्य करने में सफलता प्राप्त होती है। इन चीजों में निवेश भी लाभदायी होता हैं। जमीन, चांदी, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट, मशीनों का सामान, पशु एवं जल से जुड़े कार्यों में निवेश से बचना चाहिए।

तुला: इस राशि के लोगों को लौहा, सीमेंट, स्टील, दवाइयों, केमिकल, चमड़े, फर्टीलाइजर्स, कपड़ा, तार, इस्पात, कोयला, रत्नों, प्लास्टिक, आधुनिक यंत्रों (कंप्यूटर, कैमरे, टेलीविजन आदिबनाने वाली कंपनी) तेल में निवेश करने से उत्तम लाभ होता है।

वृश्चिक: इस राशि का स्वामी मंगल है। चंद्रमा इस राशि में नीच का होता हैं। मेष राशि की ही तरह इस राशि वालों को जमीन, मकान, दुकान, खेती, सीमेंट, रत्नों, खनिजों, खेती एवं मेडिकल के उपकरण, पूजन सामग्री, कागज, वस्त्र में निवेश से लाभ होता है। आपकी कुंडली में यदि चंद्रमा पर शनि की नजर हो तो तेल, केमिकल एवं तरल पदार्थों में निवेश करने से बचें। वर्तमानसमय में शनि की साढ़ेसाती होने से शेयर, केमिकल, लौहा, चमड़ा, सोना, चांदी, स्टील, लकड़ी, सौंदर्य सामग्री, लौहे केउपकरण, तेल में निवेश बिल्कुल नहीं करें। पूर्व में निवेश अटका हो तो मंगलवार के दिन किसी चौराहे पर तेल डालें।

धनु: इस राशि के स्वामी गुरु ग्रह हैं। गुरु व्यापारियों को लाभ देने वाला ग्रह है। विशेषकर सोने एवं अनाज का व्यापार करने वालों के लिए। इस राशि के लोगों को निवेश के लिए भी इन्हीं वस्तुओं पर ध्यान देना चाहिए। आभूषणों, रत्नों, सोना, अनाज, कपास, चांदी, शकर, चावल, औषधियों, सौंदर्य सामग्री, दूध से बने पदार्थ, पशुओं का व्यापार करने एवं उसमें निवेश करने से लाभ होता है।

मकर: इस राशि का स्वामी शनि है। शनि चंद्र से शत्रुता रखता है। इस राशि के लोगों को लोहा, इस्पात, केबल, तेल सभी प्रकारके, खाद्य सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, यंत्र, खनिज पदार्थ, खेती उपकरण, वाहन, चिकित्सा के उपकरण, वस्त्र, इत्र,सेंट, स्टील, सौन्दर्य सामग्री, ग्लेमर वर्ल्ड, फिल्म्स, नाटकों आदि में निवेश करने से लाभ होता है।जमीन, मकान, सीमेंट, सोना, चांदी, रत्न, पीतल, अनाज, वस्त्र, शेयर आदि में निवेश से बचना चाहिए।

कुंभ: इस राशि का स्वामी भी शनि ही है तथा मकर की तरह ही इसके बारे में समझना चाहिए। इस राशि के लोगों को लोहा, इस्पात, केबल, तेल सभी प्रकार के खाद्य सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, यंत्र, खनिज पदार्थ, खेती उपकरण, वाहन, मेडिकल के उपकरण, वस्त्र, इत्र, सेंट, स्टील, सौन्दर्यसामग्री, ग्लेमर वल्र्ड, फिल्म्स, नाटकों आदि में निवेश करने से लाभ होता है।जमीन, मकान, सीमेंट, सोना, चांदी, रत्न, पीतल, अनाज, वस्त्र, शेयर आदि में निवेश से बचना चाहिए।

मीन: इस राशि का स्वामी गुरु है। गुरु चंद्र का मित्र है। किसी भी प्रकार के निवेश से इन्हें बचना चाहिए। विशेषकर शेयर एवं वादा बाजार में। इनके निवेश के लिए आभूषणों, रत्नों, सोना, अनाज, कपास, चांदी, शकर, चावल, औषधियों, सौंदर्य सामग्री, दूध से बने पदार्थ, पशुओं का व्यापार करने एवं इन चीजों में निवेश करने से लाभ होता है।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी-9413156400

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ज्‍योतिष के अनुसार कौनसा मोबाइल बदलेगा आपका भाग्‍य https://moltolindia.com/according-to-astrology-which-mobile-will-change-your-fate/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/according-to-astrology-which-mobile-will-change-your-fate/contemplation-of-time/#respond Sat, 12 Oct 2024 17:29:02 +0000 https://moltolindia.com/?p=6762 Spread the loveमोबाइल (Mobile) भले ही नया उपकरण हो, प्राचीन भारतीय या पाश्‍चात्‍य ज्‍योतिष में कहीं भी ऐसे उपकरण के […]

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मोबाइल (Mobile) भले ही नया उपकरण हो, प्राचीन भारतीय या पाश्‍चात्‍य ज्‍योतिष में कहीं भी ऐसे उपकरण के बारे में सूचना नहीं मिलती है, लेकिन ज्‍योतिष सीधे उपकरण के वर्णन के बजाय वस्‍तुओं की प्रकृति के बारे में अधिक सटीकता से बताती है। समय के साथ मोबाइल में भी तेजी से परिवर्तन आ रहा है, इसके बावजूद कुछ कंपनियों के मोबाइल की प्रकृति में एक निरंतरता है। उपकरणों की बनावट में एक निरंतरता है, एप्‍लीकेशंस को देखें तो हमे पता चलता है कि उन्‍हें उपयोग करने वाले एक विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्‍व करते हैं।

दरअसल मोबाइल अन्‍य किसी उपकरण की तरह ही सामान्‍य उपकरण है, हर किसी के लिए इसकी उपयोगिता अलग अलग है। अगर हम केवल पेचकस की ही बात करें तो बिजली फिटिंग करने वालों से लेकर मंगलयान के लिए काम कर रहे वै‍ज्ञानिक के पास पेचकस हो सकता है, लेकिन हर किसी के पास इस उपकरण को इस्‍तेमाल करने का तरीका अलग होगा। यही नहीं उपकरण की बनावट में भी आवश्‍यक रूप से प्रभावी अंतर होगा।

अगर मोबाइल के आकार, प्रकार, उसकी क्षमता, बनावट का तरीका, उपयोग के आधार आदि को केन्द्र में रखकर हम विश्‍लेषण करें तो न केवल मोबाइल उपकरणों बल्कि मोबाइल एप्‍लीकेशन को इस्‍तेमाल करने वालों का ज्‍योतिषीय आधार पर क्‍लासिफिकेशन किया जा सकता है। यहां मैंने लग्‍न और राशि के अलावा प्रतिनिधि ग्रह के आधार पर मोबाइल उपयोगकर्ताओं और मोबाइल उपकरणों का वर्गीकरण करने का प्रयास किया है। आइए जानते हैं आपके लिए कौनसा मोबाइल लिए उपयोगी अथवा भाग्‍यशाली साबित हो सकता है।

मूल रूप से मोबाइल उपयोगकर्ताओं को हम दो प्रकार में बांट सकते थे, आवश्‍यकता के लिए मोबाइल रखने वाले और लग्‍जरी के लिए मोबाइल रखने वाले। आज से बीस साल पहले तक मोबाइल इन्‍हीं दो प्रकार के उपयोगकर्ताओं के पास मिलता था। अत: इसे शुक्र के आधार पर बांटा गया। कोई भी वस्‍तु जो लग्‍जरी के स्‍तर पर है, उसे शुक्र द्वारा देखा जाता है। ऐसे में शुरूआती दौर में आवश्‍यकता के अनुसार उपयोकर्ताओं के अलावा दुर्लभता के आधार पर जो लग्‍जरी थी, उसने जातकों को मोबाइल उपयोकर्ता बनाया।

वर्ष 2003 में रिलायंस के सीडीएमए मोबाइल लांच होने के एक दशक में करोड़पति व्‍यवसायी से लेकर ठेलवालों के पास तक मोबाइल एक दैनिक जरूरत के रूप में आ गया। ऐसे में मोबाइल की लग्‍जरी एक बार फिर दुर्लभता से हटकर आर्थिक आधार पर हो गई। अब हाई एण्‍ड मोबाइल शुक्र आधारित लोगों के पास दिखाई देंगे और शेष मोबाइल उपकरण हर किसी के पास हैं।

ग्रह के आधार पर मोबाइल उपयोगकर्ताओं को बांटा जाए तो यह मुख्‍य रूप से सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, वृहस्‍पति, शुक्र, शनि, राहू और केतू प्रकृति के मोबाइल हमें दिखाई देते हैं।

सूर्य प्रकृति
सूर्य प्रकृति के उपकरण आमतौर पर कुछ बड़े आकार के होंगे और मोबाइल एप्‍स की तुलना में कॉल करने में अधिक सटीकता की मांग करने वाले होंगे। चाहे ब्राउजिंग, मौसम आदि एप्‍स न भी हो तो चलेगा, लेकिन कॉल में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। सूर्य प्रकृति के जातकों के मोबाइल की होम स्‍क्रीन आपको आमतौर पर खाली दिखाई देगी। केवल एक घड़ी होम स्‍क्रीन पर होगी और ये जातक अपने मोबाइल को तलवार की तरह हाथ में मजबूती से थामे रखते हैं। चाहे कुर्सी पर बैठे ही क्‍यों न हो, अगर मोबाइल हाथ में होगा, तो मजबूती से पकड़ा हुआ होगा।

चंद्र प्रकृति
सफेद रंग के मोबाइल को दिखने में बिल्‍कुल चिकने और साफ सुथरे होते हैं। उपयोग के बावजूद इनकी स्‍क्रीन लगातार चमकाए रखी जाती है। चंद्र प्रकृति वाले मोबाइल में आपको बैकलाइट भी अधिक तेजी से चमकती हुई दिखाई देगी। चंद्र प्रकृति वाले जातक मोबाइल स्‍क्रीन को लेकर अधिक सेंसेटिव होते हैं, जिन जातकों की कुण्‍डली में चंद्रमा खराब होता है, उनकी मोबाइल स्‍क्रीन बहुत जल्‍दी टूटती है। कई बार मोबाइल खरीदने के बाद शीघ्र ही हल्‍का सा क्रेक स्‍क्रीन पर आ जाता है, खराब चंद्रमा वाले जातक इस क्रेक वाली स्‍क्रीन के मोबाइल का ही इस्‍तेमाल करते रहते हैं। मैंने कई जातकों को देखा है कि वे स्‍क्रीन को अगर दुरुस्‍त भी करा लेते हैं तो शीघ्र फिर से किसी न किसी कारण से क्रेक आ जाता है। ऐसे में आप मोबाइल देखकर जान सकते हैं कि जातक का चंद्रमा अच्‍छा है या खराब।

मंगल प्रकृति
हार्ड कवर और मोटे स्‍क्रीन कवर वाले मोबाइल आपने देखे होंगे, जैसे मोबाइल की किसी भिड़ंत से रक्षा करने के लिए उसे कवर किया गया हो। तीखे किनारों वाले और सपाट लेआउट वाले मोबाइल मंगल प्रकृति के होते हैं। मंगल प्रकृति के जातकों को हार्ड ड्यूटी मोबाइल की जरूरत होती है। क्‍योंकि इनके हाथ से मोबाइल बार बार गिरता रहता है। बिस्‍तर या सोफे पर भी ये मोबाइल को फेंककर रखते हैं। ऐसे में अगर एंड्रायड के जमाने में किसी के पास हार्ड कवर लगा नोकिया 1100 भी दिखाई दे तो मान लीजिए कि वह व्‍यक्ति मार्शियन है। ऐसा नहीं है कि ये लोग पुराना मोबाइल ही इस्‍तेमाल करेंगे, नए मोबाइल में भी मंगल प्रकृति जातक इन्‍ही खूबियों के बारे में पहले पता करेंगे। अगर वाटरप्रुफ और स्‍क्रैच प्रूफ मोबाइल मिले तो ये जातक बाकी खूबियों को दरकिनार कर भी उसे पहले खरीदेंगे। गुरिल्‍ला ग्‍लास मंगल प्रकृति जातकों के लिए वरदान की तरह है।

बुध प्रकृति
ये मुझे दो प्रकार के लोग मिले हैं। पहले प्रकार के जातक पूरी तरह अपने मोबाइल के प्रति लापरवाह होते हैं। केवल फोन पर बात हो जाए, इनके लिए पर्याप्‍त है। टूटा फूटा पुराना मोबाइल, जिसकी स्‍क्रीन भी बुरी तरह स्‍क्रैचेज से भरी हुई, कई बार तो इतनी अधिक कि स्‍क्रीन पर क्‍या डिस्‍प्‍ले हो रहा है दिखाई ही नहीं देता। मोबाइल के चयन में ये लोग बहुत चूजी होते हैं, एक बार जो मोबाइल पसंद आ गया, उसी के साथ चिपक जाते हैं, भले ही समय के साथ वह मोबाइल आउट ऑफ ऑर्डर ही क्‍यों न हो जाए, उसी को इस्‍तेमाल करते रहते हैं। ये लोग आपको मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर में अपने पुराने मोबाइल को रिपेयर करते भी दिखाई दे जाएंगे, कई बार रिपेयरिंग में मोबाइल की ऑरीजिनल कीमत से अधिक खर्च कर देते हैं। इनका मोबाइल का मुख्‍य काम संचार का ही रहता है। अपने पुराने मोबाइल को भी लगातार कान के लगाए रखते हैं। अगर ये नया मोबाइल भी ले आएं तो उसे भी जेब में रखते हैं और पुराने को ही इस्‍तेमाल करते रहते हैं।

दूसरी तरफ बुध प्रकृति के ऐसे यूजर्स भी देखे हैं जो बदलती टेक्‍नोलॉजी के साथ पूरी तेजी से दौड़ लगाते हैं। मार्केट में उपलब्‍ध सबसे आगे की तकनीक के मोबाइल इनके पास होते हैं, भले ही महंगे न हों, लेकिन मोबाइल का कांफिग्‍यूरेशन सबसे एडवांस रखने का प्रयास करते हैं। इन जातकों के मोबाइल को अगर आप देखें तो उसमें सबसे नए एप्‍प मिलेंगे। एकाउंटेंसी, बिजनेस, न्‍यूज अपडेट और एप्‍प क्रैकर या चीट कोड वाले एप्‍प भी इन लोगों के मोबाइल में प्रमुखता से होंगे। हर बार जब आप इनसे मिलते हैं तो मोबाइल के अधिकांश एप्‍प और यहां तक कि यूजर इंटरफेस भी आपको बदला हुआ मिलेगा। ये लोग अपने उपयोगों के प्रति सावधान भी होते हैं। अपने फोन का लॉक शानदार तरीके से लगाते हैं, यहां तक कि स्‍टार्ट लॉक के बाद एप्‍प पर भी अलग लॉक लगाया गया होता है। ताकि इनके द्वारा किए गए मॉडिफिकेश अथवा वार्तालाप कोई दूसरा जान न सके।

वृहस्‍पति प्रकृति
इन मोबाइल फोन का आकार कुछ बड़ा होगा, जरूरी नहीं है कि स्‍क्रीन का साइज भी बड़ा हो, लेकिन कुल बॉडी का आकार स्‍वाभाविक रूप से बड़ा होगा। कॉलिंग टैबलेट से लेकर फैबलेट या 6.7 इंच श्रेणी के मोबाइल को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। इसके साथ ही ये मोबाइल अपने क्षेत्र में सर्वाधिक मैमोरी स्‍टोरेज वाले मोबाइल होंगे। बड़ा होना, अधिक बैटरी क्षमता होना, अधिक मैमोरी होना और इंस्‍टाल्‍ड एप्‍लीकेशन की मात्रा अधिक होना वृहस्‍पति प्रकृति के मोबाइल की निशानी मानी जा सकती है। गुरु ग्रह से प्रभावित जातकों के पास भी ऐसे ही मोबाइल मिलेंगे। इन मोबाइल्‍स में अधिकांश एप्‍प सोशल नेटवर्किंग की होगी और बैटरी का अधिकांश भाग सोशल नेटवर्किंग में ही खर्च होने वाला होगा। ये लोग फोन की स्‍क्रीन की ब्राइटनेस अधिकतम तो नहीं रखते, लेकिन सामान्‍य से अधिक तेज रखते हैं। इनके मोबाइल में थीम भी सरल और साफ सुथरी होगी। आमतौर पर परिजनों अथवा करीबी मित्रों के फोटो आपको लॉक स्‍क्रीन अथवा मोबाइल स्‍क्रीन, व्‍हाट्सएप्‍प का बैकग्राउंड जैसी जगहों पर मिलेंगे। ये लोग अपने मोबाइल को शो ऑफ करने से भी नहीं चूकते हैं। नया लेंगे तो सभी को बताएंगे, अगर भीड़ में खड़े हैं तो अपना बड़े साइज का मोबाइल जेब अथवा पर्स से निकालकर हाथ में ले लेंगे। मानों इससे वे अपना स्‍टेटस बयां कर रहे हों। इन मोबाइल का महंगा होना जरूरी नहीं है, लेकिन आकार प्रकार में बड़ा होना जरूरी है।

शुक्र प्रकृति
मोबाइल जगत में सबसे एडवांस मोबाइल और सबसे महंगे फोन शुक्र प्रकृति के होंगे। भले ही एक दौर के सबसे महंगे फोन अगले दौर के सबसे घटिया फोन की श्रेणी में आते हों, लेकिन किसी एक दौर में सर्वाधिक एडवांस कांफिग्‍युरेशन वाले मोबाइल को शुक्र की प्रकृति में रखा जाएगा। जैसे आज आई फोन 15 प्रो, वन प्‍लस का सबसे नया वर्शन और और गूगल फोन को शुक्र प्रकृति का माना जाएगा। इन मोबाइल की खासियत यह होती है कि इन्‍हें बहुत करीने से डिजाइन किया जाता है और फिनिशिंग जबरदस्‍त होती है। एडवांस कैमरा, एडवांस ग्‍लास, एडवांस ऑपरेटिंग सिस्‍टम, एडवांस क्‍लॉक स्‍पीड, एडवांस रैम कुल मिलाकर आधुनिकतम गैजेट होंगे। इन्‍हें इस्‍तेमाल करने वाले जातक भी अपने मोबाइल को बहुत करीने से रखने वाले होते हैं। आमतौर पर इन मोबाइल को नंगा रखा जाता है, प्रदर्शन के लिहाज से। लग्‍जरी हो और उसका प्रदर्शन न हो तो लग्‍जरी का सेंस ही खत्‍म हो जाता है। ऐसे में शुक्र प्रकृति के मोबाइल पर कवर या तो नहीं चढ़ाया जाएगा, अगर कवर चढ़ाया भी गया है तो लैदर अथवा विशिष्‍ट श्रेणी का ऐसा कवर लगाया जाएगा तो लग्‍जरी के भाव में बढ़ोतरी करने वाला साबित हो। शनि शुक्र का मित्र है और टैक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में शनि का काला रंग शुक्र के साथ मिलकर उसे विशिष्‍ट बनाता है। ऐसे में लग्‍जरी फोन में भी सबसे ज्‍यादा पसंद किए जाने वाले फोन काले रंग के होते हैं, इसके बाद गोल्‍डन कलर पसंद किया जाएगा।

शनि प्रकृति
आपने कभी गौर किया होगा कि समूह में एक आदमी ऊंचे कद वाला, कम बोलने वाला होता है, उसके पास भले ही साधारण फोन हो या आधुनिकतम उसके मोबाइल की रिंगटोन बहुत धीमी होती है। ये शनि वाले जातक हैं और इनका मोबाइल भी इन्‍हीं की तरह शांत और गंभीर होता है। इससे मतलब नहीं है कि मोबाइल महंगा है या सस्‍ता, लेकिन यह तय है कि इसे इस्‍तेमाल करने वाला जातक फोन का अधिकतम उपयोग करेगा। अगर एडवांस कांफिग्‍युरेशन वाला मोबाइल है तो कॉल करने से लेकर मोबाइल बैंकिंग तक का इस्‍तेमाल शनि का जातक अपने फोन में ही करेगा। जब तक फोन उपयोगी है उसका पूरा उपयोग किया जाएगा, जब वह फोन जातक के काम के लिए उपयोगी साबित होना बंद हो जाएगा, तो जातक तुरंत दूसरा फोन लेगा। ये लोग फोन पर धीमे स्‍वर में बातें करते हैं, सो इन्‍हें साफ आवाज के स्‍पीकर और नॉयस कैंसिलेशन की खास उपयोगिता वाला मोबाइल पसंद होता है। अगर मोबाइल पर बात करते समय वॉइस टोन को ऊंचा करना पड़े तो ये लोग अपने मोबाइल को तुरंत या तो ठीक करवाएंगे या बदल देंगे। अगर आप इन लोगों का मोबाइल हाथ में लेते हैं तो पाएंगे कि स्‍क्रीन पर अस्‍त व्‍यस्‍तता बिल्‍कुल नहीं होगी, जो काम के लिए उपयोगी एप्‍प हैं उन्‍हें तरतीब से जमाया गया होता है और बाकी के एप्‍प को किनारे पटका गया होता है अथवा अनइंस्‍टॉल कर दिया गया होता है। इन लोगों के मोबाइल की बैटरी की समस्‍या भी अपेक्षाकृत कम होती है, क्‍योंकि ये लोग समय पर फोन को चार्ज पर लगाते हैं और बैटरी की उपलब्‍धता के अनुसार ही मोबाइल का उपयोग करते हैं।

राहू प्रकृति
ये लोग बिल्‍कुल अस्‍त व्‍यस्‍त लोग होते हैं और इनके मोबाइल भी इन्‍हीं की तरह। ग्रे मार्केट में मिलने वाले ऐसे चाइनीज फोन जिनके बारे में यह कहना मुश्किल है कि कितने समय चलेगा और क्‍या सुविधाएं देगा, राहू की श्रेणी के मोबाइल माने जा सकते हैं। इन्‍हें उपयोग करने वाले राहू प्रकृति के जातक मोबाइल का इस्‍तेमाल इतने रफ तरीके से करते हैं कि शीघ्र ही मोबाइल के कोने घिस जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि पुराना होने से पहले ही मोबाइल घिसा पिटा दिखाई देने लगता है। मोबाइल में बिना इस्‍तेमाल के बीसीयों एप्‍प बेकार पड़े मिल जाएंगे, जिनका कभी उपयोग ही नहीं होता है। ये लोग अपने मैमोरी कार्ड को भी तेजी से भरते हैं और उसे वापस खाली करने का सामर्थ्‍य भी नहीं जुटा पाते हैं। बार बार हैंग होने वाले, डिस्‍प्‍ले में वैरिएशन वाले, एप्‍प के क्रैश होने वाले मोबाइल इस श्रेणी में आते हैं। राहू के जातक अपने मोबाइल की इंटरनल मैमोरी और एसडी कार्ड दोनों को इतनी बेरहमी से भरते हैं कि खरीदने के कुछ ही दिन में मोबाइल हैंग होने लगता है। बार बार गिरने के बावजूद राहू के मोबाइल बाहर से अपेक्षाकृत दुरुस्‍त नजर आते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं, इसका परिणाम यह होता है‍ कि मोबाइल मालिक इन मोबाइल का कभी सही या पूरा उपयोग ही नहीं कर पाता है। ऐसे में राहू प्रकृति के मोबाइल को इसके उपयोगकर्ता बार बार फैक्‍ट्री रीसेट कर फिर से काम लायक बनाने की कोशिश करते रहते हैं।

केतू प्रकृति
सामान्‍य तौर पर मोबाइल एक ही रंग का होता है, लेकिन कुछ मोबाइल ऊपर से काले और पीछे से सफेद या इसके ठीक उलट होते हैं। इनके कोने तीखे होते हैं, मैटल वाले फोन में तो इतने तीखे कि चमड़ी में चुभा भी सकते हैं। ये केतू प्रकृति के मोबाइल होते हैं। इन्‍हें इस्‍तेमाल करने वाले जातक फोन को अपने पास कम रखते हैं। केतू के जातक अपने फोन को कहीं भी छोड़कर या भूलकर आ सकते हैं। अगर ये लोग अपने मोबाइल पर कवर लगाते हैं तो वह कवर भी रंगबिरंगा होगा। कोई चित्र नहीं, बल्कि एब्‍सट्रैक्‍ट डिजाइन होगी, आमतौर पर दो या तीन रंगों से बनी हुई डिजाइन होगी। ये लोग मोबाइल को अपने लिए सिरदर्द मानते हैं और जरूरी होने पर ही काम लायक बातचीत मोबाइल पर करते हैं। इन्‍हें मूल रूप से अपना मोबाइल ही पसंद नहीं होता है। इनके लिए कम्‍युनिकेशन कुछ पीड़ादायक ही होता है। अव्‍वल तो ये लोग अपनी पसंद का फोन लेते ही नहीं है और अगर लेते हैं अथवा कोई इन्‍हें गिफ्ट में दे देता है तो उस पर जल्‍दी से कवर और स्‍क्रीन गार्ड लगा लेते हैं। कालांतर में कवर और स्‍क्रीन गार्ड दोनों पर छोटे छाटे कट के निशान दिखाई देने लगते हैं।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी-9413156400

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इस ग्रह से प्रभावित होता है आपका बिजनेस डाटा https://moltolindia.com/your-business-data-is-affected-by-this-planet/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/your-business-data-is-affected-by-this-planet/contemplation-of-time/#respond Sun, 10 Mar 2024 01:50:35 +0000 https://moltolindia.com/?p=2029 बाजार में तकनीक का समावेश बहुत ही तेज गति से होता है। खासकर कंप्‍यूटर के आने के बाद तो नित नई तकनीकी उपकरण शामिल होते जा रहे हैं।

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बाजार में तकनीक का समावेश बहुत ही तेज गति से होता है। खासकर कंप्‍यूटर के आने के बाद तो नित नई तकनीकी उपकरण शामिल होते जा रहे हैं। इनमें से एक महत्‍वपूर्ण टूल है डाटा। आज से दस-पंद्रह साल पहले तक कंप्‍यूटर से जुड़े उपकरणों का क्रैश हो जाना, डाटा करप्‍ट हो जाना और वायरस से पीडि़त हो जाना बहुत आम बात थी, कालांतर में बहुत से व्‍यवसायियों ने मल्‍टीपल लेयर सुरक्षा की व्‍यवस्‍थाएं की। आज भी डाटा को केवल कंप्‍यूटर में रखने के बजाय ऑफलाइन हार्ड डिस्‍क और ऑनलाइन क्‍लाउड पर भी रखते हैं।

दशाओं के ऐसे दौर में सावधान रहें दांव लगाने से…

ज्‍योतिषीय कोण से किसी भी प्रकार का डाटा, चाहे वह ऑफलाइन हो, कंम्‍प्‍यूटर पर हो या क्‍लाउड पर हो, तीनों प्रकार के डाटा को बुध से देखा जाता है। बुध वाणी का, संचार का और डाटा का कारक ग्रह माना गया है। जिस जातक की कुण्‍डली में बुध नकारात्‍मक रूप से प्रभावित होगा, उस जातक की वाणी में दोष होगा, उसके लिए कम्‍युनिकेशन मुश्किल होगा और उसका डाटा बार बार करप्‍ट होकर नष्‍ट होता रहेगा।

इसी बुध का दूसरा महत्‍वपूर्ण कोण है गोचर में बुध की स्थिति। बुध सूर्य का सबसे करीबी ग्रह है और पृथ्‍वी की तुलना में तीव्र गति से सूर्य की परिक्रमा करता है। जितना समय पृथ्‍वी एक बार सूर्य का चक्‍कर लगाने में लगाती है, उतने समय में बुध सूर्य के 88 चक्‍कर लगा चुका होता है। ऐसे में पृथ्‍वी से बुध की सापेक्ष गति देखी जाए तो कभी यह अतिचारी, कभी मंदचारी तो कभी वक्री दिखाई देता है। बुध की यही वक्र गति डाटा के लिए बड़ा नुकसानप्रद साबित होती है।

जाम कर देता है केतु का दौर…

जिन जातकों की जन्‍मपत्रिका में बुध मार्गी हो, उन्‍हें गोचर में बुध वक्री होने के समय बहुत अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है। उनके संचार उपकरण, उनके कम्‍युनिकेशन और उनके डाटा पर उस दौर में खतरा बना रहता है। दूसरी और जिन जातकों की जन्‍मपत्रिका में बुध नैसर्गिक रूप से वक्री है, उन जातकों को वक्री से पुन: मार्गी होता हुआ बुध इन्‍हीं मामलों में भारी क्षति करने की आशंका बनाए रखता है। अगर जातक की कुण्‍डली में बुध की दशा, अंतरदशा अथवा प्रत्‍यंतरदशा भी चल रही हो तो यह परिणाम अधिक तीव्रता के साथ दिखाई देते हैं।

इसके बचाव के लिए आप यह कर सकते हैं कि अपने डाटा को बुध वक्री होने से ठीक पूर्व ऑफलाइन सुरक्षित करके रख दें और जब तक बुध की वक्रता बनी रहे, तब तक किसी भी सूरत में उन्‍हें न छेड़ें। वक्री बुध के दिनों में प्रत्‍येक बुधवार गणेश मंदिर जाएं और गणेशजी को बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। ये उपचार जेनेरिक उपचार हैं। बाकी व्‍यक्तिगत जन्‍मपत्रिका के विश्‍लेषण से ही बताया जा सकता है कि बार बार वक्री बुध से होने वाले डाटा के नुकसान से कैसे बचा जाए।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी
+91-9413156400

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भाग्‍य की अनुकूलता कैसे बनी रहे https://moltolindia.com/how-to-remain-favourable-to-fate/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/how-to-remain-favourable-to-fate/contemplation-of-time/#respond Fri, 23 Feb 2024 00:22:32 +0000 https://moltolindia.com/?p=1465 Spread the loveप्रतिकूल समय जातक किसी भी तरह सह लेता है, चाहे अपनी स्‍वयं की क्षमताओं से, बाहरी सहायता से, […]

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प्रतिकूल समय जातक किसी भी तरह सह लेता है, चाहे अपनी स्‍वयं की क्षमताओं से, बाहरी सहायता से, देवताओं और पूर्वजों के आशीर्वाद से, किसी भी तरीके से जातक समय काट लेता है, लेकिन भाग्‍य की चुनौती वहीं समाप्‍त नहीं हो जाती, बल्कि असली चुनौती ही तब मिलती है कि समय अनुकूल हो, सब कुछ ठीक चल रहा हो, तब एक भय उत्‍पन्‍न होता है कि जो सब कुछ अुनकूल चल रहा है, वह बना तो रहेगा।

ऐसे दौर में कुछ जातक ऐसे ज्‍योतिषीय उपचार भी कर बैठते हैं जो कि अंतत: उनकी जन्‍मपत्रिका के अनुकूल नहीं होते और अच्‍छे भले चलते काम में बिना ठोस कारण के रोड़े आने लगते हैं। निजी तौर पर जब मेरे पास ऐसे जातक कोई ज्‍योतिषीय उपचार पूछने आते हैं तो मेरा जवाब होता है कि चलती हुई गाड़ी का चक्‍का नहीं निकाला जाता, जब सब कुछ ठीक चल रहा हो, तब अलग से कोई उपचार शुरू मत करो, केवल गाड़ी अटक जाए, तभी बोनट, इंजन, चक्‍का आदि संभालो।

इसके बावजूद अगर किसी जातक को कोई नियमित साधना या उपचार करना हो तो अपने ईष्‍ट की साधना करना श्रेष्‍ठ होता है। हर जातक की कुण्‍डली में एक या दो कारक ग्रह होते हैं। इन कारक ग्रहों के अनुकूल देवता की अराधना करने से कभी नुकसान नहीं होता। रूपक के तौर पर कहा जाए तो जन्‍मपत्रिका के कारक ग्रहों से संबंधित देवता की आराधना करने से गाड़ी को नियमित रूप से ईंधन मिलता रहेगा, इससे जो गाड़ी वर्तमान में सही चल रही है, वह सही प्रकार चलती रहेगी, अगर कोई अचानक बड़ी विपत्ति आने वाली भी हो तो आपका ईष्‍ट उसे संभाल लेता है।

मोटे तौर पर मेष लग्‍न में हनुमानजी, वृषभ लग्‍न में देवी, मिथुन लग्‍न में गणेशजी, कर्क लग्‍न में महादेव, सिंह लग्‍न में सूर्यदेव, कन्‍या लग्‍न में गणपति, तुला लग्‍न में देवी, वृश्चिक लग्‍न में बजरंगबली, धनु लग्‍न में श्रीहरि, मकर तथा कुंभ लग्‍न में शनिदेव तथा मीन लग्‍न में लक्ष्‍मीनारायण प्रमुख देवता होते हैं। यह लग्‍न के अनुसार है। अब किसी जन्‍मपत्रिका में कारक ग्रह का निर्धारण लग्‍न, चंद्र, लग्‍नाधिपति, चंद्रेश और ग्रहों की विशिष्‍ट स्थिति से ही किया जा सकता है। प्रत्‍येक जन्‍मपत्रिका में किसी एक कारक ग्रह और उसके देवता का निर्धारण किया जा सकता है। जिनकी हर दशा और अंतरदशा में आराधना लाभदायक सिद्ध होती है।

अपने अनुकूल अथवा प्रतिकूल समय में ऐसे देवता की आराधना करना श्रेष्‍ठ फलदायी सिद्ध होता है और जीवन की गाड़ी के अटकने की आशंकाएं बहुत हद तक कम हो जाती हैं।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी-9413156400

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कब होता है ट्रेडिंग में नुकसान https://moltolindia.com/when-does-loss-occur-in-trading/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/when-does-loss-occur-in-trading/contemplation-of-time/#respond Mon, 19 Feb 2024 07:12:37 +0000 https://moltolindia.com/?p=1254 Spread the loveबाजार में ट्रेडिंग कर रहे जातकों में बहुत से ऐसे जातक भी होते हैं, जिन्‍हें न केवल बाजार […]

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बाजार में ट्रेडिंग कर रहे जातकों में बहुत से ऐसे जातक भी होते हैं, जिन्‍हें न केवल बाजार की अच्‍छी समझ होती है, बल्कि वे जब भी बाजार के बारे में अपना कोई पूर्वानुमान बताते हैं तो उनका पूर्वानुमान गजब की सटीकता के साथ फलित होता है। इसके बावजूद ये जातक जब खुद ट्रेडिंग करने बैठते हैं तो नुकसान लेकर उठते हैं। ऐसा क्‍यों होता है?

इस पहेली को समझने के लिए पहले हमें जानना होगा कि बाजार में ट्रेडिंग कौन कर सकता है और कौन नहीं, अगर ट्रेडिंग करने की क्षमता है तो लाभ देने वाले ग्रह कौनसे हैं और नुकसान देने वाले ग्रह कौनसे हैं। किस दिन ट्रेडिंग करनी चाहिए और किस दिन बाजार से सावधानीपूर्वक दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

ट्रेडिंग कौन कर सकता है? : जिस जातक की कुण्‍डली में पंचम और एकादश भाव बहुत ही मजबूत हो और चंद्रमा एवं मंगल ग्रह प्रभावी हों वही जातक ट्रेडिंग कर सकता है। चाहे शेयर बाजार हो या कमोडिटी बाजार, दोनों में ट्रेडिंग की समझ गुरु से आती है और ट्रेडिंग करने की क्षमता बुध से आती है। गुरु उतार चढ़ाव की समझ देता है और बुध गणनाओं की। इन दोनों की अनुकूलता हमें बाजार तो समझा देती है, लेकिन सौदा करने की हिम्‍मत हमें मंगल देता है और अपने किए गए सौदे के साथ खड़े रहने या समय पर निकल जाने की समझ चंद्रमा देता है। पंचम भाव बांड अथवा डील का होता है और एकादश भाव लाभ का होता है। यह सभी अनुकूल होने पर ही कोई जातक ट्रेडिंग में नियमित रूप से लाभ ले पाता है।

पंचम भाव मजबूत हो तो जातक में दांव लगाने की प्रवृत्ति होगी, अन्‍यथा नहीं। अगर किसी जातक की कुण्‍डली में गुरु अनुकूल न हो तो जातक बाजार को ठीक प्रकार समझ नहीं पाएगा। अगर बुध अनुकूल न हो तो बाजार की समझ होने के बावजूद सही प्रकार से गणनाएं नहीं कर पाएगा। मंगल अनुकूल न हो तो बाजार की समझ और सटीक गणनाएं होने बावजूद दांव लगाने की हिम्‍मत नहीं कर पाएगा।

अगर चंद्रमा क्षीण हो और शेष सभी अनुकूलताएं हों यानी गुरु से बाजार का सही अनुमान, बुध से सटीक गणनाएं, मंगल से दांव लगाने का हौसला होने के बावजूद अपने ही किए सौदे के प्रति जातक का विश्‍वास डोल जाता है और गलत समय पर सौदा तोड़ देता है, परिणाम यह होता है कि सबकुछ सही होने पर भी या तो लाभ बहुत कम रह जाता है अथवा नुकसान हासिल करता है।

इसके साथ ही यह भी ध्‍यान रखना चाहिए कि हर जातक का प्रत्‍येक दिन अनुकूल नहीं होता, लेकिन बाजार तो रोज खुलता है और रोजाना सौदे होते हैं। ऐसे में जातक को ध्‍यान रखना चाहिए कि प्रत्‍येक दिन सौदा करने का नहीं होता है। कौनसे दिन सौदा करने के हो सकते हैं, यह पता करने के दो तरीके हैं।

राशि आधारित अनुकूलता : जन्‍म राशि से चतुर्थ, अष्‍टम एवं द्वादश भावगत चंद्रमा गोचर हो तो जातक भी जातक को सौदा करने से बचना चाहिए। प्रत्‍येक राशि में चंद्रमा सवा दो दिन तक रहता है। इस प्रकार महीने में करीब छह दिन ऐसे होते हैं जब ट्रेडिंग करने पर हानि होने की आशंका प्रबल रहेगी। दूसरी ओर जन्‍मराशि से चंद्रमा द्वितीय, पंचम और एकादश होने पर लाभ होने की संभावना सर्वाधिक होगी।

नक्षत्र आधारित अनुकूलता : कुल 27 नक्षत्र होते हैं। आपके जन्‍म नक्षत्र से एक, तीन, पांच, सात आदि नक्षत्र होने पर अपेक्षाकृत प्रतिकूलता रहेगी और द्वितीय, चतुर्थ, षष्‍ठ होने पर अनुकूलता रहेगी। एक एक नक्षत्र का स्‍वतंत्र रूप से पता करने से बेहतर है कि नक्षत्र का चार्ट बना लिया जाए और दो या तीन आवृत्ति तक उन नक्षत्रों में होने वाले लाभ और हानि को नोट करते जाएं। इससे आपको स्‍वयं अनुमान हो जाएगा कि कौनसा नक्षत्र अनुकूल है और किस नक्षत्र में ट्रेडिंग नहीं करनी है, इससे हानि कम होती जाएगी और लाभ की संभावनाएं बढ़ती चली जाएंगी।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी–+919413156400

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दशाओं के ऐसे दौर में सावधान रहें दांव लगाने से… https://moltolindia.com/be-careful-while-placing-bets-in-such-circumstances/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/be-careful-while-placing-bets-in-such-circumstances/contemplation-of-time/#respond Sat, 03 Feb 2024 09:11:20 +0000 https://moltolindia.com/?p=677 Spread the loveकुछ ग्रहों की दशाएं ऐसी होती हैं कि चाहें आपकी कुण्‍डली कितनी भी ताकतवर क्‍यों न हो, उन […]

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कुछ ग्रहों की दशाएं ऐसी होती हैं कि चाहें आपकी कुण्‍डली कितनी भी ताकतवर क्‍यों न हो, उन दशाओं के दौर में निश्चित तौर पर नुकसान ही होता है। ऐसा ही ग्रह है राहु। चाहे राहु की महादशा हो, अंतरदशा हो, प्रत्‍यंतरदशा हो या सूक्ष्‍म दशा हो, जब भी राहु का रोल आएगा तो वह निश्चित तौर पर नुकसान करेगा। डेली ट्रेडिंग करने वालों को तो राहु के गोचर और राहु की दशा एवं दिन में होने वाले राहुकाल का भी विशेष ध्‍यान रखना चाहिए।

क्‍या है राहु : ज्‍योतिष में राहु को प्‍लेनेट ऑफ अन्‍सर्टेनिटी यानी अनिश्चितता का ग्रह कहा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन में से जो अमृत निकला, उसे मोहिनी रूप में आए विष्‍णु उड़ा ले गए। बाद में देवताओं को कतार में बैठा दिया गया और स्‍वयं भगवान विष्‍णु उन्‍हें एक एक कर अमृत पान कराने लगे। इसी दौर में एक राक्षस भी भेष बदलकर कतार में आकर बैठ गया। सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया। जब मोहिनी रूपी विष्‍णु छद्मवेषधारी राक्षस को अमृत चखा ही रहे थे कि सूर्य और चंद्रमा ने तुरंत चेताया और भगवान विष्‍णु ने अपने सुदर्शन से राक्षस का गला काट दिया। तब तक अमृत अपना काम कर चुका था। देह के दो भाग हुए। सिर भाग को राहु और धड़ भाग को केतु कहा गया।

जब भी जन्‍मपत्रिका में राहु का रोल आता है तब वहां राहु चूंकि सिर भाग है, अंत: जातक के सिर भाग पर ही हमला करता है। इसका परिणाम होता है कि बुध जो कि बुद्धि का ग्रह है, पीडि़त हो जाता है। गुरु जो जीवकारक है, पीडि़त हो जाता है और अपनी चुगली के कारण नाराज राहु एवं केतु चंद्रमा और सूर्य को भी ग्रस लेते हैं।

यह कैसे नुकसान पहुंचाता है: मेरा निजी अनुभव यह रहा है कि राहु की दशा, अंतरदशा, प्रत्‍यंतरदशा और सूक्ष्‍म में जब राहु जातक को नुकसान पहुंचाने वाला होता है तो उसके समक्ष ऐसी प्रॉमिसिंग संभावनाएं लेकर आता है, जिससे जातक को लगता है कि अमुक स्‍वर्णिम अवसर का लाभ उठाकर वह बहुत तेजी से तरक्‍की कर पाएगा। लेकिन जैसे ही निवेश होता है, उसके साथ ही नुकसान होना शुरू हो जाता है। नुकसान का चक्रीय क्रम इतना तेज चलता है कि जातक चाहकर भी उस दुष्‍चक्र से बाहर नहीं आ पाता और डैमेज होता चला जाता है।

इसके नुकसान के प्रमुख तरीके हैं : यह कैपिटल इन्‍वेस्‍टमेंट को डुबा देता है। यह अल्‍पकालिक या कहें राहु के दौर तक चलने वाले निवेशों को ध्‍वस्‍त करता है। यह व्‍यापार में चल रहे मनी रोटेशन को जाम कर देता है। साझे में चल रहे व्‍यापार में यह आपसी अंडस्‍टैंडिंग को बिगाड़ता है। कई बार लिटिगेशन और सत्ता से भी अचानक बड़ा नुकसान दिलाता है।

क्‍या राहु हमेशा नुकसान ही दिलाता है: अगर संभावना की बात करें तो 100 में से 90 या 95 प्रतिशत मामलों में राहु नुकसान ही करता है। शेष पांच से दस प्रतिशत मामलों में अगर लाभ भी होता है तो वह अल्‍पकालिक लाभ होता है, अंतत: वह लाभ भी जाता रहता है। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो राहु की दशा में अर्जित किए गए धन, संपत्ति अथवा लाभ को आगे की दशाओं तक ले जा पाते हैं।

राहु की दशा कितने समय की होती है: राहु की महादशा अठारह साल की होती है। किसी अन्‍य दशा में राहु की अंतरदशा छह महीने से तीन साल तक की हो सकती है। मसलन सूर्य की महादशा में राहु की अंतरदशा छोटी होगी और शुक्र की महादशा में राहु की अंतरदशा बड़ी होगी। राहु की प्रत्‍यंतर दशा कुछ महीने की ही होती है और सूक्ष्‍म दशा कुछ दिनों तक चलती है। सबसे लंबी अवधि महादशा की होती है, उससे कम अंतरदशा की, उससे कम प्रत्‍यंतरदशा की और सबसे कम सूक्ष्‍म दशा की अवधि होती है। जितने समय तक राहु का दौर रहेगा, तब तक जातक की कुण्‍डली पर राहु का प्रभाव रहेगा।

इससे बचाव के लिए क्‍या कर सकते हैं: सामान्‍य तौर पर राहु की दशा के दौरान कठोर और ठोस निर्णय लेने से बचा जाए तो सर्वश्रेष्‍ठ है। विपरीतर सौदों और डील को राहु का दौर समाप्‍त होने तक लटकाए रखना श्रेष्‍ठ है, राहु का दौर बीतने के बाद स्थितियां फिर से नॉर्मल होने लगती हैं। दैवीय सहायता में भैरवजी की कृपा प्राप्‍त कर लाभ प्राप्‍त किया जा सकता है।

प्रत्‍येक जातक के लिए राहु के मायने अलग अलग होते हैं और अगर ज्‍योतिषीय उपचारों की बात की जाए तो प्रत्‍येक जन्‍मपत्रिका के लिए राहु के विशिष्‍ट उपचार होते हैं। इसके लिए किसी सक्षम ज्‍योतिषी से सलाह लेकर गंभीरतापूर्वक उपचार करें तो नुकसान से बहुत अधिक बचा जा सकता है, प्रगति की बहुत अधिक उम्‍मीद नहीं कर सकते।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी +91-9413156400

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जाम कर देता है केतु का दौर… https://moltolindia.com/ketus-phase-jams/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/ketus-phase-jams/contemplation-of-time/#respond Fri, 26 Jan 2024 09:01:04 +0000 https://moltolindia.com/?p=414 Spread the loveकिसी व्‍यवसायी की कुण्‍डली में केतु की महादशा का दौर बहुत कठिन दौर होता है। चाहे वह महादशा […]

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किसी व्‍यवसायी की कुण्‍डली में केतु की महादशा का दौर बहुत कठिन दौर होता है। चाहे वह महादशा हो, अंतरदशा हो, प्रत्‍यंतर हो या सूक्ष्‍म दशा हो। केतु की दशा के दौरान जो काम जहां होता है, वहीं थमकर रह जाता है। रत्‍ती भर भी आगे नहीं बढ़ता। चाहे कितने भी प्रयास कर लिए जाएं, किसी न किसी अटपटी समस्‍या को लेकर काम अटका हुआ पड़ा रहा है। केतु के पहले बुध का दौर होता है और बाद में शुक्र का। सामान्‍य तौर पर व्‍यापारियों के लिए यह दोनों ग्रह अनुकूल फल देने वाले होते हैं, लेकिन इन दोनों ग्रहों के बीच आती है केतु की दशा जो चलते हुए काम को अटका देती है। खासतौर पर नई योजनाओं और नए प्रोजेक्‍ट्स को यह केतु अधिक कठिनाई देता है।

ज्‍योतिष में केतु को हैडलैस कहा गया है। केतु में बुद्धि नहीं होती, केवल क्रिया होती है। यानी केतु के दौर में जातक काम खूब करता है, सुबह से शाम तक गले तक व्‍यस्‍तताओं में फंसा रहता है, लेकिन उसकी हालत कोल्‍हू के बैल जैसी ही रहती है। शून्‍य से शुरूआत कर पुन: शून्‍य पर आ टिकता है। अगर केतु की महादशा हो, जो कि सात साल तक चलती है, तो यह शून्‍य से शून्‍य तक की दौड़ बार बार होती है, अगर अंतरदशा हो जो कि लगभग एक साल की होती है, तो चक्‍कर कुछ छोटे हो सकते हैं। प्रत्‍यंतरदशा कुछ माह की होती है, इस अवधि में चल रहे काम बिल्‍कुल रूक जाते हैं, बिना किसी ठोस कारण के और सूक्ष्‍म दशा कुछ दिनों की होती है, तब कम्‍युनिकेशन गैप अथवा कागजों की पूर्ति जैसे निरर्थक कार्यों की एवज में काम अटका रहता है।

खराब बात यह है कि केतु अटकाकर रखता है, लेकिन इसी की अच्‍छी बात यह है कि केतु गिराता नहीं है, व्‍यापारी का प्रोफाइल या स्‍टेटस कमोबेश एक जैसा बना रहता है, अगर प्रगति नहीं होती तो गिरावट भी बहुत अधिक नहीं होती है। प्रयास अधिक होते हैं और सभी प्रयास निष्‍फल जाते हैं। केतु के ठीक बाद शुक्र का दौर आता है, चाहे महादशा में हो या सूक्ष्‍म में, तब केतु में किए गए प्रयासों का उचित फल शुक्र में मिलने लगता है, बशर्तें जातक की कुण्‍डली में शुक्र फलदायी स्थिति में विराजमान हो।

इस केतु के लिए सामान्‍यीकृत उपचार संकटमोचक गणपति के पाठ बताए जाते हैं और कुत्‍तों की सेवा करना बताया जाता है। अन्‍य विशिष्‍ट उपचारों के लिए आपको किसी सक्षम ज्‍योतिषी की सलाह लेकर केतु के उपचार करने चाहिए, इससे केतु के दौरान होने वाले तनाव से बचने में मदद मिलती है और गंभीर नुकसान होने से बचा जा सकता है।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी–+919413156400

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