सोना-चांदी Archives - Moltol India https://moltolindia.com/commodity-non-agri/gold-silver/ Business News Today: Read the latest Business News on the Indian Stock Market, Commodity Market, Currency News, Global Market, Upcoming IPOs, Indian Economy, and more. Get Stock and Share market news, Finance News, Agri Commodity Market, Non-Agri Commodity Market, Sensex, Nifty Live, Commodity Market, IPO news, economy news, personal finance news, Drone News, today only at Moltol India Thu, 19 Feb 2026 03:51:36 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://moltolindia.com/wp-content/uploads/2025/09/cropped-Moltol-New-Logo-Munafe-ki-baat-32x32.jpeg सोना-चांदी Archives - Moltol India https://moltolindia.com/commodity-non-agri/gold-silver/ 32 32 सोना-चांदी: सट्टेबाजों के हाथ में बाजार की कमान https://moltolindia.com/gold-and-silver-speculators-control-the-market/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-and-silver-speculators-control-the-market/commodity-non-agri/#respond Thu, 19 Feb 2026 03:51:31 +0000 https://moltolindia.com/?p=12031 Spread the loveकीमती धातुओं के दाम एक बार फिर “धीरे-धीरे ऊपर और तेजी से नीचे” के पैटर्न पर चलते दिखे […]

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कीमती धातुओं के दाम एक बार फिर “धीरे-धीरे ऊपर और तेजी से नीचे” के पैटर्न पर चलते दिखे हैं। मेटल्‍स डेली के सीईओ रॉस नॉर्मन की मानें तो जनवरी में सोना, चांदी में तेज रैली और रिकॉर्ड ऊंचाइयां देखने को मिलीं, जबकि फरवरी में तेज करेक्शन, आंशिक रिकवरी और फिर नई अस्थिरता ने बाजार को दुविधा भरे कंसोलिडेशन फेज में ला खड़ा किया है।

नॉर्मन कहते हैं कि फिलहाल कीमतों की चाल मूलभूत कारकों से ज्यादा सट्टा प्रवाह से संचालित हो रही है। खासकर चीन के डेरिवेटिव कारोबार का प्रभाव बढ़ा हुआ है, जिससे दाम कई बार बुनियादी मांग-आपूर्ति से उलट दिशा में चलते दिखे। उनका कहना है कि ऐसे उतार-चढ़ाव में खुदरा निवेशक नुकसान उठाते हैं, संस्थागत निवेशक दूरी बना लेते हैं, औद्योगिक उपभोक्ता विकल्प तलाशते हैं और केंद्रीय बैंक भी सतर्क रुख अपना लेते हैं।

तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से, किसी बड़ी गिरावट के बाद करीब 50% की रिकवरी को तेजी के जारी रहने का संकेत माना जाता है। अधिकांश धातुएं इस स्तर तक नहीं पहुंच सकीं और प्रमुख रेजिस्टेंस से पहले ही ठहर गईं। इससे बाजार में ‘एम्बर लाइट’ जैसा माहौल बना हुआ है—तेज रिकवरी बुल्स के लिए सकारात्मक है, लेकिन मजबूत अमेरिकी आंकड़े, डॉलर की मजबूती और फेड की दर कटौती में देरी जैसी चुनौतियों के बीच इसे निर्णायक तेजी नहीं माना जा सकता।

इस परिदृश्य में सोना सबसे बेहतर प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरा है। यह हालिया ऊंचाई से केवल 12% नीचे है और 50% रिट्रेसमेंट स्तर पार कर चुका है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर से दूरी की प्रवृत्ति और संप्रभु कर्ज को लेकर चिंताएं सोने को संरचनात्मक समर्थन दे रही हैं। यूके, यूरोप और एशिया में बुलियन शोरूम में मांग बेहद मजबूत बताई जा रही है। भारत में प्रीमियम ऊंचे दामों के बावजूद दशक के उच्च स्तर के करीब हैं, हालांकि चीन में मौसमी मांग कुछ नरम पड़ी है।

दूसरी ओर, चांदी में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी है। जनवरी के 122 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर से यह अब भी करीब 38% नीचे है। नॉर्मन के अनुसार जनवरी की लगभग 60% तेजी मुख्यतः सट्टा आधारित थी, जिससे बाद में डी-लेवरेजिंग का दबाव आया। हालांकि, पिछले छह वर्षों से आपूर्ति घाटा और मजबूत औद्योगिक व ज्वेलरी मांग के बावजूद मौजूदा कीमतें इन कारकों से अलग दिख रही हैं।

सैमसंग सहित अन्य कंपनियों द्वारा सॉलिड-स्टेट बैटरियों का उत्पादन भविष्य में चांदी की मांग को नई दिशा दे सकता है। यदि 2035 तक करीब 10% वाहनों में प्रति कार लगभग 1 किलोग्राम चांदी का उपयोग होता है, तो 6,000 से 8,000 टन अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है, जो वैश्विक खनन आपूर्ति का लगभग एक-चौथाई होगी।

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JP Morgan ने बताया क्यों अभी खत्म नहीं होगी सोने की रैली https://moltolindia.com/gold-and-silver-will-remain-volatile-in-2026-james-steel-2/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-and-silver-will-remain-volatile-in-2026-james-steel-2/commodity-non-agri/#respond Wed, 18 Feb 2026 03:43:13 +0000 https://moltolindia.com/?p=12029 Spread the loveसोने की कीमतों में पिछले पांच साल में 170% से ज्यादा की जबरदस्त तेजी आई है। कई लोग […]

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सोने की कीमतों में पिछले पांच साल में 170% से ज्यादा की जबरदस्त तेजी आई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब यह रैली थम सकती है? लेकिन J.P. Morgan के एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने के खिलाफ दलीलें अभी सही साबित नहीं होंगी।

जेपी मॉर्गन प्राइवेट बैंक की कृति गुप्ता और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट जस्टिन बीमैन के मुताबिक, सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद केंद्रीय बैंकों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीदा है। 2022 के बाद से सेंट्रल बैंकों की नेट खरीद दोगुनी हो चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर केंद्रीय बैंक अचानक सोना खरीदना बंद कर दें या बेचने लगें तो यह बड़ा जोखिम हो सकता है। इतिहास में 1999-2002 के दौरान ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड द्वारा सोना बेचने से कीमतों में गिरावट आई थी। हालांकि, मौजूदा हालात में ऐसा होने की संभावना कम बताई गई है। 2025 में 95% केंद्रीय बैंकों ने संकेत दिया है कि वे अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाना चाहते हैं।

इमर्जिंग मार्केट देशों में अभी भी गोल्ड रिजर्व की हिस्सेदारी विकसित देशों से कम है। खासकर चीन, पोलैंड, भारत और ब्राजील लगातार सोना खरीद रहे हैं। चीन के कुल रिजर्व में सोना अभी केवल 8.6% है, जिससे आगे और खरीद की गुंजाइश बनती है।

दूसरा जोखिम रिटेल निवेशकों से जुड़ा है। अगर आम निवेशक अचानक सोने से दूरी बना लें तो कीमतों पर दबाव आ सकता है। लेकिन फिलहाल ETF होल्डिंग्स 2020 के रिकॉर्ड स्तर से नीचे हैं, यानी रिटेल निवेश अभी ‘ओवरहीट’ नहीं है।

जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि 2026 में भी सेंट्रल बैंक हर तिमाही औसतन 585 टन सोना खरीद सकते हैं। कमजोर डॉलर, कम ब्याज दरें और वैश्विक अनिश्चितता जैसे फैक्टर सोने के लिए अभी भी सपोर्टिव माने जा रहे हैं। बैंक का मानना है कि सोने की तेजी भले सीधी रेखा में न चले, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अभी खत्म नहीं हुआ है।

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2026 में सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव रहेगा हावी: जेम्स स्टील https://moltolindia.com/gold-and-silver-will-remain-volatile-in-2026-james-steel/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-and-silver-will-remain-volatile-in-2026-james-steel/commodity-non-agri/#respond Tue, 17 Feb 2026 04:48:24 +0000 https://moltolindia.com/?p=12014 Spread the loveसाल 2026 में कीमती धातुओं का बाजार तेज उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) से प्रभावित रहेगा। यह कहना है HSBC के […]

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साल 2026 में कीमती धातुओं का बाजार तेज उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) से प्रभावित रहेगा। यह कहना है HSBC के चीफ प्रेशियस मेटल्स एनालिस्ट James Steel का। उन्होंने CNBC को दिए एक इंटरव्‍यू में कहा कि फेडरल रिजर्व की नीतियां और अमेरिकी डॉलर में एक्सपोजर सोने की मांग को दिशा देते रहेंगे।

स्टील ने कहा कि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.30% से घटकर 4.00% तक आने के बावजूद सोने में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी है। उनके मुताबिक 2022 से पहले 10-वर्षीय वास्तविक ब्याज दर (यील्ड माइनस महंगाई) और सोने के बीच मजबूत विपरीत संबंध था, जो ब्रेटन वुड्स व्यवस्था के अंत के बाद से स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। लेकिन हाल के वर्षों में यह संबंध कमजोर पड़ गया है।

उन्होंने कहा कि अब सोना वास्तविक दरों, खासकर 10-वर्षीय यील्ड, के प्रति पहले जितना संवेदनशील नहीं है। इसके पीछे खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, भू-राजनीतिक जोखिम और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद अहम कारण हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में यह संबंध फिर मजबूत हो सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं दिखता।

फेड की स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों के संदर्भ में स्टील ने कहा कि जब तक फेड अपनी स्वतंत्रता बनाए रखता है, बाजार संतुलित रहेगा। लेकिन केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह का खतरा सोने की कीमतों को समर्थन दे सकता है।

डॉलर के ‘डिबेसमेंट हेज’ के रूप में सोने की भूमिका पर उन्होंने कहा कि एचएसबीसी का मानना है कि डॉलर लंबे समय तक दुनिया की आरक्षित मुद्रा बना रहेगा। हालांकि कई केंद्रीय बैंक अपने डॉलर भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं। उनके अनुसार 2022 के बाद से केंद्रीय बैंकों की सोना खरीद पिछले दशक के औसत से दो से तीन गुना तक अधिक रही है।

स्टील ने कहा कि हाल के वर्षों में सोने ने उल्लेखनीय तेजी दर्ज की है। 1980 में 850 डॉलर का पुराना उच्च स्तर था, जो मुद्रास्फीति समायोजित आधार पर आज के मूल्यों में करीब 3,400 डॉलर बैठता है। अप्रैल में सोना इस स्तर से ऊपर निकल चुका है और लगातार नए उच्च स्तर बना चुका है। उनके मुताबिक हाल की सुस्ती से तेजी का रुख खत्म नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने आगाह किया कि जनवरी में आई पराबोलिक तेजी के बाद बाजार में नया पैसा आया है, जिससे उतार-चढ़ाव बढ़ना स्वाभाविक है। “सुरक्षित निवेश होने का मतलब यह नहीं कि सोना अस्थिर नहीं होगा। 2026 में सोने के लिए सबसे अहम शब्द रहेगा—वोलैटिलिटी।”

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दूसरी तिमाही में सोना 5,800 डॉलर: ANZ https://moltolindia.com/gold-to-reach-5800-in-second-quarter-anz/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-to-reach-5800-in-second-quarter-anz/commodity-non-agri/#respond Tue, 17 Feb 2026 04:44:14 +0000 https://moltolindia.com/?p=12010 Spread the loveअंतरराष्ट्रीय बैंक ANZ ने सोने पर अपना दूसरा तिमाही मूल्य लक्ष्य बढ़ाते हुए 5,800 डॉलर प्रति औंस कर […]

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अंतरराष्ट्रीय बैंक ANZ ने सोने पर अपना दूसरा तिमाही मूल्य लक्ष्य बढ़ाते हुए 5,800 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। इससे पहले बैंक का लक्ष्य 5,400 डॉलर था। बैंक के अनुसार हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने की तेजी अभी थमी नहीं है।

अपनी ताजा रिपोर्ट में एएनजेड के कमोडिटी विश्लेषकों ने कहा कि सोना फिलहाल 5,000 डॉलर के आसपास स्थिर होता दिख रहा है, लेकिन यह स्तर लंबे समय तक बाधा नहीं बनेगा। पिछले महीने 5,600 डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से आई तेज गिरावट ने कुछ निवेशकों को 1980 और 2011 जैसी ऐतिहासिक गिरावटों की आशंका से चिंतित किया है। हालांकि बैंक का मानना है कि मौजूदा हालात पहले जैसे नहीं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व से कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। घटते महंगाई दबावों के बीच दिसंबर तक तीसरी कटौती की संभावना भी बाजार में जोड़ी जा रही है। एएनजेड का अनुमान है कि मार्च और जून में 25-25 आधार अंकों की दो कटौतियां होंगी, जिससे वास्तविक ब्याज दरें नीचे आएंगी और सोने में निवेश को समर्थन मिलेगा।

बैंक ने कहा कि भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएं बनी रहेंगी। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावना भी बाजार के लिए जोखिम बनी हुई है। साथ ही फेड की विश्वसनीयता को लेकर उठते सवाल भी निवेशकों को वास्तविक परिसंपत्तियों, खासकर सोने की ओर आकर्षित कर सकते हैं।

एएनजेड के अनुसार वैश्विक वित्तीय व्यवस्था एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी, जिसे कभी जोखिम-मुक्त परिसंपत्ति माना जाता था, बढ़ते कर्ज, फेड की स्वतंत्रता पर चिंताओं और प्रतिबंधों के जोखिम के कारण भरोसे की चुनौती झेल रहा है। लंबी अवधि की यील्ड पर बढ़ते प्रीमियम से यह रुझान स्पष्ट है।

बैंक का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सोना एक संक्रमणकालीन और स्थिरता प्रदान करने वाली परिसंपत्ति के रूप में उभरता है। जब तक भू-राजनीतिक स्थिरता, अमेरिका की राजकोषीय समस्याओं का समाधान और फेड की साख बहाल नहीं होती, तब तक सोने में रणनीतिक निवेश प्रासंगिक रहेगा।

मांग के विभिन्न पहलुओं पर एएनजेड ने कहा कि 2026 तक केंद्रीय बैंकों की खरीद मजबूत रहने का अनुमान है, लेकिन इस साल निवेश मांग प्रमुख भूमिका निभाएगी। गोल्ड-समर्थित ईटीएफ में निवेश बढ़ने की संभावना है और कुल होल्डिंग 4,800 टन से ऊपर जा सकती है। पश्चिमी बाजारों के साथ-साथ चीन और भारत जैसे उभरते बाजारों से भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिनकी वैश्विक ईटीएफ होल्डिंग में हिस्सेदारी मौजूदा 10% से आगे बढ़ सकती है।

बैंक ने यह भी कहा कि यदि भू-राजनीतिक या राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं और निवेशकों का रुख इक्विटी व बॉन्ड से सोने की ओर होता है, तो कीमतों में और तेज उछाल संभव है। फिलहाल गोल्ड ईटीएफ का एसेट अंडर मैनेजमेंट कुल इक्विटी और बॉन्ड होल्डिंग का 3% से भी कम है, ऐसे में मामूली पोर्टफोलियो बदलाव भी सोने की कीमतों पर बड़ा सकारात्मक असर डाल सकते हैं।

चांदी पर भी एएनजेड का रुख सकारात्मक है, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक इसकी अधिक अस्थिरता के कारण इस साल यह सोने से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। उनका कहना है कि चांदी की चाल सोने पर निर्भर रहेगी और औद्योगिक मांग ऊंची कीमतों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर सकती है, जिससे इसका दायरा अपेक्षाकृत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला रहेगा।

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सोने-चांदी के अगले हफ्ते इन लेवल्‍स को टच करने की संभावना https://moltolindia.com/gold-and-silver-are-likely-to-touch-these-levels-next-week/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-and-silver-are-likely-to-touch-these-levels-next-week/commodity-non-agri/#respond Sun, 14 Sep 2025 01:04:22 +0000 https://moltolindia.com/?p=10812 Spread the loveनई दिल्‍ली। सोने की कीमतों में लगातार चौथे हफ़्ते लगातार बढ़ोतरी जारी रही और यह 1.5 फीसदी बढ़कर […]

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नई दिल्‍ली। सोने की कीमतों में लगातार चौथे हफ़्ते लगातार बढ़ोतरी जारी रही और यह 1.5 फीसदी बढ़कर 109,840 रुपए प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया। यह तेज़ी उल्लेखनीय रही है, क्योंकि सोने ने इस साल अब तक लगभग 42 फीसदी की बढ़त दर्ज की है, जिसे अमेरिका के नरम आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंक की नरम रुख़ वाली उम्मीदों और लगातार भू-राजनीतिक तनावों का मिला-जुला समर्थन मिला है।

एसएस वैल्‍थ स्‍ट्रीट की फाउंडर सुगंधा सचदेवा का कहना है कि अमेरिका में, अगस्त की कमज़ोर रोज़गार रिपोर्ट और मुद्रास्फीति के अनुमानों ने अगले हफ़्ते होने वाली फ़ेडरल रिज़र्व की बैठक में 25 आधार अंकों की कटौती की बाज़ार की उम्मीदों को मज़बूत किया है। बाज़ार अब साल के अंत से पहले तीन कटौतियों की संभावना पर विचार कर रहे हैं, हालाँकि निवेशक फ़ेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के आगे के दिशानिर्देशों पर कड़ी नज़र रखेंगे। जापान, फ़्रांस और नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता ने अतिरिक्त अनिश्चितता पैदा की है, जिससे सोने में सुरक्षित निवेश का प्रवाह और बढ़ गया है।

सचदेवा का कहना है कि चांदी भी तेज़ी से बढ़ रही है, सोने-चांदी का अनुपात अप्रैल के 104 के उच्चतम स्तर से घटकर लगभग 86 पर आ गया है, जो चांदी के मज़बूत सापेक्ष प्रदर्शन का संकेत है। चांदी इस साल अब तक लगभग 48 फीसदी बढ़ चुकी है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 42 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गई है, और मज़बूती से ऊपर की ओर बढ़ रही है।

आगे देखते हुए, सर्राफा बाजार अमेरिकी फेड की बैठक के नतीजों के प्रति बेहद संवेदनशील रहेंगे। हालाँकि 25 आधार अंकों की कटौती काफी हद तक तय है, लेकिन कोई भी आश्चर्यजनक कदम—जैसे कि 50 आधार अंकों की कमी, जो संभवतः राष्ट्रपति ट्रम्प के राजनीतिक दबाव से प्रभावित हो—तेज़ अस्थिरता पैदा कर सकता है।

एसएस वैल्‍थ स्‍ट्रीट की फाउंडर सुगंधा सचदेवा का कहना है कि तकनीकी मोर्चे पर, सोने को 105,800 रुपए प्रति 10 ग्राम पर मज़बूत सपोर्ट है, जबकि निकट भविष्य में 112,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रेजिस्‍टेंस दिखाई दे रहा है। चांदी 129,392 रुपए प्रति किलोग्राम की नई ऊंचाई पर पहुंच गई है और निकट भविष्य में 131,000 रुपए प्रति किलोग्राम तक बढ़त दर्ज करने की संभावना है, जिसमें 123,500 रुपए किलोग्राम पर प्रमुख सपोर्ट है।

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सोने के बढ़ते भावों का असर नवरात्रि, दशहरा और धनतेरस की खरीदारी पर पड़ने की संभावना https://moltolindia.com/rising-price-of-gold-is-likely-to-affect-the-purchases-of-navratri-dussehra-and-dhanteras/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/rising-price-of-gold-is-likely-to-affect-the-purchases-of-navratri-dussehra-and-dhanteras/commodity-non-agri/#respond Tue, 09 Sep 2025 13:17:00 +0000 https://moltolindia.com/?p=10815 Spread the loveमुंबई। सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी नवरात्रि, दशहरा और धनतेरस (दिवाली) से शुरू होने वाले त्योहारों के […]

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मुंबई। सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी नवरात्रि, दशहरा और धनतेरस (दिवाली) से शुरू होने वाले त्योहारों के चरम सीज़न के दौरान मांग को कम कर सकती है, क्योंकि ग्राहक कीमतों में गिरावट की आशंका में अपनी आभूषण खरीदारी रोक रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में इस साल सोने की कीमतों में लगभग 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जब इसी अवधि में सोने की कीमतें 71,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब थीं।

वैश्विक बाजारों में मजबूती के रुख की वजह से मंगलवार को सोने की कीमतें 1,438 रुपए प्रति 10 ग्राम बढ़कर 1,09,475 रुपए प्रति 10 ग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जबकि सोमवार को यह 1,08,037 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

एमसीएक्स पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सबसे ज़्यादा कारोबार वाला सोना वायदा 982 रुपए की बढ़त के साथ 1,09,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया। यह अगले हफ़्ते अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीदों के बीच वैश्विक संकेतों के अनुरूप था।

विदेशी बाज़ारों में, दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स सोना वायदा 3,698 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, हाजिर सोना भी बढ़कर 3,658 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि उपभोक्ता कीमतों में उछाल के साथ तालमेल बिठाते हुए हल्के आभूषणों का चुनाव कर रहे हैं और अपने बजट के अनुकूल विभिन्न कैरेट के आभूषणों के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि हमें मात्रा में लगभग 10-15 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है, लेकिन कुल बिक्री मूल्य में वृद्धि होने की उम्मीद है, जो सोने के साथ मज़बूत भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव, खासकर शादियों और शुभ अवसरों के दौरान, को बढ़ावा देगा।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष और एस्पेक्ट ग्लोबल वेंचर्स की कार्यकारी अध्यक्ष अक्षा कंबोज ने कहा कि कीमतों में तेज़ वृद्धि से उपभोक्ता धारणा प्रभावित होने के कारण, मात्रा के हिसाब से मांग में 20-30 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव यह सुनिश्चित करते हैं कि साल के इस समय में सोने की खरीदारी मोटे तौर पर उसी स्तर पर जारी रहेगी, लेकिन उपभोक्ता अधिक सावधान और संयमित रहेंगे।

ऋद्धिसिद्धि बुलियंस के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि मज़बूत सांस्कृतिक धारणा के बावजूद इस त्यौहारी सीज़न में सोने के आभूषणों की मांग कम रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि शादियों और त्यौहारों के कारण कुछ ज़रूरी खरीदारी को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन विवेकाधीन मांग कमजोर रहने की उम्मीद है क्योंकि उपभोक्ता या तो खरीदारी कम करेंगे या हल्के डिज़ाइनों की ओर रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि शहरी खरीदार खरीदारी में देरी कर सकते हैं, जबकि ऊंची कीमतों के बीच सामर्थ्य पर दबाव के कारण ग्रामीण मांग कम हो सकती है।

ऑग्मोंट की शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी ने कहा कि खरीदार भारी आभूषणों के बजाय हल्के आभूषण, 18 कैरेट सोने के आभूषण या सिक्के चुन सकते हैं। हालांकि सामर्थ्य के दबाव के कारण मुख्य धारणा सतर्क रहेगी, उन्होंने कहा कि खुदरा विक्रेता मेकिंग चार्ज में कटौती कर सकते हैं, आकर्षक एक्सचेंज ऑफर दे सकते हैं और सोने की बचत योजनाओं के साथ ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं।

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Gold Price: सोना नई ऊंचाई पर, कब दिखेगी मुनाफावसूली, पढ़ें रिपोर्ट https://moltolindia.com/gold-price-gold-at-new-high-when-will-profit-booking-be-seen-read-the-report/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-price-gold-at-new-high-when-will-profit-booking-be-seen-read-the-report/commodity-non-agri/#respond Mon, 17 Mar 2025 00:22:00 +0000 https://moltolindia.com/?p=8872 Spread the loveमुंबई। सोने ने लगातार दूसरे सप्ताह अपनी निरंतर तेजी जारी रखी और अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में […]

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मुंबई। सोने ने लगातार दूसरे सप्ताह अपनी निरंतर तेजी जारी रखी और अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। घरेलू मोर्चे पर सोना 88310 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया जबकि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर इसने 3,004.90 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छुआ। इस साल अब तक, सोने की कीमतों में लगभग 14 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो कई व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों की वजह से है।

एसस वैल्‍थ स्‍ट्रीट की फाउंडर सुगंधा सचदेवा का कहना है कि सोने की तेजी को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारक सोने की कीमतों में हाल ही में हुई तेजी को कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है: अमेरिकी टैरिफ नीतियों से आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा उतार-चढ़ाव वाले टैरिफ निर्णयों ने वैश्विक व्यापार चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे सुरक्षित-संपत्ति के रूप में सोने की अपील बढ़ गई है। कमजोर अमेरिकी मुद्रास्फीति और फेड दर में कटौती की उम्मीदें: सीपीआई और पीपीआई मुद्रास्फीति दोनों रीडिंग उम्मीद से कम आईं, जिससे उम्मीदें मजबूत हुईं कि अमेरिकी फेड जून की शुरुआत में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। फरवरी में कोर सीपीआई 0.2 फीसदी रहा, जो बाजार की आम सहमति 0.3 फीसदी से कम है, जबकि साल-दर-साल सीपीआई 2.8 फीसदी पर आ गया, जो एक साल पहले 3.0 फीसदी था।

कमजोर होता डॉलर इंडेक्स: डॉलर इंडेक्स में साल-दर-साल 4 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए वैकल्पिक संपत्ति के रूप में सोना अधिक आकर्षक हो गया है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी की होड़: वैश्विक केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं, पिछले तीन वर्षों से सालाना 1000 टन से अधिक की खरीद कर रहे हैं, जो रणनीतिक आरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की भूमिका को रेखांकित करता है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर वित्तीय प्रतिबंध लगाने के बाद यह प्रवृत्ति तेज हो गई, जिसमें 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के लिए उसके केंद्रीय बैंक के भंडार को फ्रीज करना भी शामिल है।

निवेशकों का इक्विटी से सोने की ओर रुख: वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों को सुरक्षित आश्रय के लिए इक्विटी से धन को फिर से सोने में लगाना पड़ रहा है। टैरिफ अनिश्चितता ने वैश्विक आर्थिक विकास के लिए जोखिम बढ़ा दिया है और निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में शामिल कर रहे हैं। आने वाले सप्ताह में, बाजार सहभागी फेड, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की नीति बैठकों के साथ-साथ प्रमुख अमेरिकी खुदरा बिक्री डेटा और डॉलर इंडेक्स मूवमेंट पर नज़र रखेंगे।

सचदेवा का कहना है कि आर्थिक संकेतकों से परे, भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने की चाल के प्रमुख चालक होंगे। चल रहे टैरिफ युद्ध में कोई भी वृद्धि या रूस-यूक्रेन युद्धविराम समझौते के 30 दिनों के बारे में नए अपडेट सुरक्षित-संपत्ति के रूप में सोने की अपील को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। तकनीकी मोर्चे पर, सोना पहले ही 2930 डॉलर प्रति औंस और 86600 रुपए प्रति 10 ग्राम के प्रमुख रेजिस्‍टेंस स्तरों को पार कर चुका है, और हम देखते हैं कि अगर कीमतें 3000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर और 89500 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर टिकी रहती हैं, तो यह 3050 डॉलर प्रति औंस के निशान की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, कम से कम निकट भविष्य में, इन स्तरों के पास मुनाफ़ा-बुकिंग या थकावट की संभावना है।

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Gold Price: इन पांच कारणों से बढ़ रही है सोने की कीमतें https://moltolindia.com/gold-price-gold-prices-are-increasing-due-to-these-five-reasons/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/gold-price-gold-prices-are-increasing-due-to-these-five-reasons/commodity-non-agri/#respond Tue, 21 May 2024 13:50:49 +0000 https://moltolindia.com/?p=3970 Spread the loveसोने की कीमतों में अब तक लगभग 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। घरेलू बाजारों में सोने के […]

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सोने की कीमतों में अब तक लगभग 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। घरेलू बाजारों में सोने के दाम 74,442 प्रति दस ग्राम के भाव के साथ नए रिकॉर्ड स्‍तर है। एसएस वेल्थस्ट्रीट की संस्थापक सुगंधा सचदेवा इस इस अभूतपूर्व रैली के पीछे पांच प्रमुख कारण मानती हैं:

भूराजनीतिक तनाव: सुगंधा सचदेवा का कहना है कि भू-राजनीतिक संघर्ष, जैसे कि इज़राइल-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच, ने महत्वपूर्ण वैश्विक अनिश्चितता पैदा कर दी है। अस्थिरता का यह माहौल निवेशकों को अपने धन की सुरक्षा के लिए सोने जैसी सुरक्षित-संपत्ति की तलाश करने के लिए मोड़ता है। इन भू-राजनीतिक मुद्दों से जुड़ा जोखिम सोने की बढ़ती मांग के लिए मुख्‍य रुप से जिम्‍मेदार है।

सेंट्रल बैंक खरीद: केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से उभरते बाजारों में, अपने सोने के भंडार में काफी वृद्धि कर रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य उनकी हिस्सेदारी में विविधता लाना और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना है। केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद ने सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन प्रदान किया है और इसके जारी रहने की उम्मीद है, जिससे बाजार में और तेजी आएगी।

मौद्रिक सहजता की उम्मीदें: अमेरिका में ब्याज दरें चरम पर होने के साथ, बाजार सहभागियों को फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष की दूसरी छमाही में मौद्रिक सहजता की उम्मीद है। कम ब्याज दरें सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत को कम करती हैं, जिससे निवेशकों के बीच इसका आकर्षण और मांग बढ़ती है।

बढ़ता अमेरिकी कर्ज: उच्च ब्याज दरों के बीच ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ने के साथ, अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज रिकॉर्ड 34 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ गया है। पिछले एक दशक में, अमेरिका में कर्ज भुगतान दोगुना से अधिक हो गया है, जिससे आर्थिक अनिश्चितता पैदा हो गई है। यह परिदृश्य संभावित आर्थिक अस्थिरता और उच्च ऋण स्तरों से जुड़े अवमूल्यन जोखिमों के खिलाफ बचाव के रूप में सोने की मांग को बढ़ाता है।

बढ़ती चीनी खुदरा मांग: 2024 की पहली तिमाही में, चीन की सोने की खपत साल-दर-साल लगभग 6 फीसदी बढ़ी। दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक के रूप में, चीन की बढ़ती मांग वैश्विक सोने की कीमतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। चीनी उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती क्रय शक्ति और निवेश रुचि ने सोने की कीमतों में बढ़ोतरी में योगदान दिया है।

ये पांचों मुख्‍य कारक सामूहिक रूप से 2024 में सोने की बढ़ती कीमतों में योगदान कर रहे हैं, जो आर्थिक, भू-राजनीतिक और मौद्रिक गतिशीलता को दर्शाते हैं जो निवेशकों के रुख और बाजार के रुझान को प्रभावित करते हैं।

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ज्‍वैलर्स को इस साल अक्षय तृतीया फीकी रहने की आशंका https://moltolindia.com/jewelers-fear-akshaya-tritiya-will-be-lackluster-this-year/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/jewelers-fear-akshaya-tritiya-will-be-lackluster-this-year/commodity-non-agri/#respond Tue, 16 Apr 2024 02:27:47 +0000 https://moltolindia.com/?p=3205 Spread the loveमुंबई। आभूषण खुदरा विक्रेताओं को सोने की बढ़ती कीमतों के कारण इस साल अक्षय तृतीया फीकी रहने की […]

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मुंबई। आभूषण खुदरा विक्रेताओं को सोने की बढ़ती कीमतों के कारण इस साल अक्षय तृतीया फीकी रहने की आशंका है। पिछले साल की तुलना में इस बार सोने के आभूषणों की बिक्री में लगभग 15-20 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद है।

कारोबारियों का कहना है कि यह अक्षय तृतीया उद्योग के लिए मात्रा के लिहाज से सुस्त रहने की उम्मीद है। क्योंकि सोने की कीमत लगभग 20 प्रतिशत बढ़ गई है, हम उम्मीद कर रहे हैं कि मात्रा 15-20 प्रतिशत प्रभावित होगी। मूल्य के लिहाज से आप यथास्थिति देखेंगे।

इस साल 10 मई को अक्षय तृतीया है और इस पर्व पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ग्राहक आम तौर पर त्योहार मनाने के लिए सोने के गहने खरीदने के लिए देश भर में आभूषण की दुकानों पर जाते हैं। हालांकि, सोने की कीमतों में मौजूदा तेजी से इस अक्षय तृतीया के दौरान उपभोक्ता मांग कम होने की उम्मीद है।

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चीन के बारे में आर्थिक चिंताओं के कारण मजबूत मांग के कारण शुक्रवार को सोने की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।

सोने के आभूषणों की कम मांग की स्थिति से निपटने के लिए, कोलकाता स्थित सेंको गोल्ड एंड डायमंड्स हीरे के आभूषणों और हल्के आभूषणों की बिक्री पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। रिटेलर मेकिंग चार्ज में भी छूट दे रहा है.

कुल आभूषण बिक्री में हीरे के आभूषणों की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है। अगर पिछले साल मात्रा के हिसाब से सोने के आभूषणों की बिक्री 5 प्रतिशत बढ़ी, तो उसी दौरान हीरे के आभूषणों की बिक्री 20 प्रतिशत बढ़ी। हीरे के आभूषण अधिक पसंद किए जा रहे हैं।

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आरबीआई बना रहा है सोने का भंडार https://moltolindia.com/rbi-is-building-gold-reserves/commodity-non-agri/gold-silver/ https://moltolindia.com/rbi-is-building-gold-reserves/commodity-non-agri/gold-silver/#respond Sat, 06 Apr 2024 03:22:00 +0000 https://moltolindia.com/?p=3014 Spread the loveमुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि भारत अपनी विदेशी मुद्रा तैनाती के […]

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि भारत अपनी विदेशी मुद्रा तैनाती के हिस्से के रूप में सोने के भंडार का निर्माण कर रहा है।

दास ने यहां पारंपरिक नीति-पश्चात समीक्षा प्रेस कांफ्रेंस में संवाददाताओं से कहा कि हम सोने के भंडार का निर्माण कर रहे हैं जो हमारे रिजर्व परिनियोजन का एक हिस्सा है। उन्होंने सोने की खरीद की मात्रा के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों की ओर इशारा किया जो सोने के भंडार के मूल्य में वृद्धि दर्शाता है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 22 मार्च को विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का मूल्य 51.487 अबर डॉलर था, जो मार्च 2023 के अंत के मूल्य से 6.287 अरब डॉलर अधिक है।

एक हालिया समाचार रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने अकेले जनवरी में 8.7 टन सोना खरीदा जो दो वर्षों में सबसे अधिक है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, जनवरी के अंत में केंद्रीय बैंक की सोने की होल्डिंग पिछले महीने के 803.58 टन से बढ़कर 812.3 टन हो गई थी।

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वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों से गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की समीक्षा करने को कहा https://moltolindia.com/finance-ministry-asks-public-sector-banks-to-review-gold-loan-portfolio/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/finance-ministry-asks-public-sector-banks-to-review-gold-loan-portfolio/commodity-non-agri/#respond Wed, 13 Mar 2024 10:25:00 +0000 https://moltolindia.com/?p=2164 केंद्र सरकार द्वारा नियामक मानदंडों का अनुपालन न करने के मामले सामने आने के बाद वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों से अपने गोल्‍ड लोन (स्वर्ण ऋण) पोर्टफोलियो की समीक्षा करने को कहा है।

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नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार द्वारा नियामक मानदंडों का अनुपालन न करने के मामले सामने आने के बाद वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों से अपने गोल्‍ड लोन (स्वर्ण ऋण) पोर्टफोलियो की समीक्षा करने को कहा है। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), जो वित्त मंत्रालय का हिस्सा है, ने सरकारी बैंकों के प्रमुखों को पत्र लिखा और उनसे गोल्‍ड लोन से संबंधित अपनी प्रणाली और प्रक्रियाओं को देखने के लिए कहा।

डीएफएस ने सबसे पहले 27 फरवरी को एक पत्र जारी किया था और सभी सरकारी बैंकों को 1 जनवरी, 2022 के बाद जारी किए गए प्रत्येक गोल्‍ड लोन खाते की समीक्षा करनी थी। डीएफएस चाहता था कि बैंक गोल्‍ड लोन अकाउंटस की पूरी समीक्षा करें।

यह सर्कुलर साल-दर-साल आधार पर गोल्ड लोन में बढ़ोतरी के मद्देनजर जारी किया गया था। सोने की कीमतों में 16.6 फीसदी की तेजी की तुलना में गोल्‍ड लोन में 17 फीसदी की वृद्धि हुई। 26 जनवरी तक सोने के आभूषणों के बदले कर्ज 1.01 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने गोल्‍ड लोन पोर्टफोलियो के संबंध में गैर-अनुपालन के मामलों को देखा है और इसलिए निर्देश जारी किया है।

देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पास अकेले दिसंबर 2023 तक 30,881 करोड़ रुपए का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो है। तीसरी तिमाही के अंत में पंजाब नेशनल बैंक का गोल्ड लोन एक्सपोजर 5,315 करोड़ रुपए था जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा का गोल्ड लोन 3,682 करोड़ रुपए था।

आरबीआई के नियमों के मुताबिक, बैंक या गोल्ड लोन फाइनेंस फर्म आभूषण के मूल्य का केवल 75 प्रतिशत ही प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, कठिनाई को कम करने के लिए COVID-19 अवधि के दौरान छूट दी गई थी।

पिछले हफ्ते, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आईआईएफएल फाइनेंस लिमिटेड पर गोल्‍ड लोन स्वीकृत करने या वितरित करने या उसके किसी भी गोल्‍ड लोन को आवंटित करने, प्रतिभूतिकरण करने या बेचने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, आरबीआई ने अपने आदेश में कहा कि आईआईएफएल को सामान्य संग्रह और वसूली प्रक्रियाओं के माध्यम से अपने मौजूदा गोल्‍ड लोन पोर्टफोलियो की सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई थी।

आरबीआई ने अपने हालिया ऑडिट में कहा कि उसे आईआईएफएल फाइनेंस के 67 फीसदी गोल्ड लोन खाते में गोल्ड लोन-टू-वैल्यू अनुपात में विचलन मिला है। वित्त वर्ष 2013 में आईआईएफएल द्वारा दिए गए 18.9 लाख गोल्‍ड लोन में से 82,000 खाते उधारकर्ताओं द्वारा डिफ़ॉल्ट के कारण नीलामी के लिए गए हैं। इन 82,000 खातों में से आरबीआई के निरीक्षण में नीलामी के समय 55,000 खातों में गड़बड़ी पाई गई है।

आरबीआई ने आईआईएफएल को अपने नकद संवितरण की सीमा 2 लाख रुपए तक सीमित करने के लिए भी कहा है, जबकि पहले 2 लाख रुपए तक नकद वितरण की व्यवस्था थी। जवाब में, आईआईएफएल ने कहा कि गोल्ड लोन कारोबार पर रोक हटने के बाद वह वैधानिक सीमा का अनुपालन करेगा।

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मांग की चिंता के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव https://moltolindia.com/pressure-on-silver-prices-due-to-demand-concerns/commodity-non-agri/ https://moltolindia.com/pressure-on-silver-prices-due-to-demand-concerns/commodity-non-agri/#respond Sun, 04 Feb 2024 03:07:21 +0000 https://moltolindia.com/?p=686 Spread the loveवर्ष 2023 में सोने की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद, चांदी, जिसे अक्सर सोने की सहयोगी […]

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वर्ष 2023 में सोने की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद, चांदी, जिसे अक्सर सोने की सहयोगी धातु कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सपाट रही। पहली तिमाही में इसकी शुरुआत अच्छी रही, लेकिन कई कारणों ने इसे प्रभावित किया और पिछले वर्ष के दौरान कीमतों को एक सीमित दायरे में दबा दिया।

लेकिन घरेलू बाजार में, कीमतें लगभग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं और साल के अंत में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कमजोर भारतीय रुपया, फिजिकल मांग की उम्मीद और सोने में तेजी ने चांदी को प्रभावित किया।

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जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी हैड हरीश वी का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से, चांदी सोने के प्रदर्शन के साथ चलती है। हालां‍कि, पिछले कुछ वर्षों में, चांदी का मूल्य प्रदर्शन सोने से भिन्न रहा है। इस वस्तु में औद्योगिक उपयोग और निवेश दोनों हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस धातु का औद्योगिक उपयोग उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जिससे इसके प्राइस आउटलुक पर काफी प्रभाव पड़ा है।

पहले, कई निवेशक चांदी को मूल्य का भंडार और मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव मानते थे। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता का सामना करती है तो चांदी के सिक्कों, बार और ईटीएफ की मांग आम तौर पर अधिक होती है। हालांकि, हाल ही में, चांदी की कीमतों ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, यूएस फेड नीति निर्णयों और पिछले साल अस्थिर अमेरिकी मुद्रा के प्रति मध्यम प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिससे संकेत मिलता है कि आकस्मिक अवधि के दौरान कमोडिटी एक सुरक्षित कमोडिटी के रूप में निवेशकों की वरीयता खो रही है।

वैश्विक चांदी बाजार में चीन की भूमिका बढ़ती जा रही है। देश इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और मैन्‍युफेक्‍चरिंग सहित विभिन्न उद्योगों में एक प्रमुख खिलाड़ी है जिसमें चांदी का खासा उपयोग किया जाता है। इसलिए, देश में इस क्षेत्र में वृद्धि वस्तु की मांग में योगदान करती है। चीन से हाल ही में जारी निराशाजनक आर्थिक विज्ञप्तियों ने उनकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव और इस प्रकार चांदी की मांग को उजागर किया है।

पहली तिमाही में शुरुआती उछाल देखने के बाद, चीनी अर्थव्यवस्था लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और अपने उत्पादों की धीमी वैश्विक मांग से जूझ रही है। अधिकांश प्रमुख गतिविधि संकेतक पिछले साल आम सहमति की उम्मीदों से कम रहे, जिससे औद्योगिक धातुओं की मांग प्रभावित हुई।

पिछले साल, कई पारंपरिक सराफा निवेशक बांड और अमेरिकी डॉलर जैसी अमेरिकी संपत्तियों में स्थानांतरित हो गए, जो उच्च ब्याज उपज की पेशकश करते थे। ऐसा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दर वृद्धि नीतिगत निर्णयों के कारण हुआ। सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों का ब्याज दरों से नकारात्मक संबंध होता है।

वहीं, सिल्वर इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, कमजोर मांग और आपूर्ति में मामूली गिरावट के बावजूद, वैश्विक चांदी बाजार को लगातार तीसरे साल 2023 में घाटे का सामना करना पड़ा। विशेषकर चीन और पेरू से कम उप-उत्पाद उत्पादन के कारण प्राथमिक चांदी खदानों से चांदी के उत्पादन में गिरावट आई है। यह भी पूर्वानुमान है कि घाटा निकट भविष्य में भी बना रहेगा।

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आगे देखते हुए, चूंकि मांग में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, 2024 में वैश्विक चांदी की कीमतों में गिरावट जारी रहेगी। औद्योगिक उपयोग से विशेष रूप से हरित प्रौद्योगिकी पक्ष से लाभ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नुकसान से ऑफसेट होने की संभावना है। हालांकि, बड़े पैमाने पर फिजिकल बाजार घाटे की उम्मीदें और चीन की आर्थिक सुधार की उम्मीदें, क्योंकि उनकी सरकार आर्थिक सहायता बढ़ा रही है, संभवतः मांग का समर्थन कर सकती है। इसी तरह, रिपोर्ट है कि ईंधन कोशिकाओं में उपयोग के लिए चांदी महंगी प्लैटिनम समूह धातुओं की जगह ले सकती है, जिससे मांग की उम्मीद बढ़ जाती है और इस प्रकार इसकी कीमत बढ़ जाती है।

लंदन के प्रमुख बाजार में, शुरुआत में कीमतें 26-20 डॉलर प्रति औंस के स्तर के भीतर होने की संभावना है, और कोई भी अप्रत्याशित घटना इस क्षेत्र से ब्रेकआउट का कारण बन सकती है। घरेलू स्तर पर, एमसीएक्स चांदी वायदा के लिए कड़ा सपोर्ट 65,000 रुपए के करीब है, और मुख्य रेजिस्‍टेंस 76,500 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर देखा जा रहा है।

(मोलतोल ब्‍यूरो; +91-75974 64665)

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