admin, Author at Moltol India https://moltolindia.com/author/admin/ Business News Today: Read the latest Business News on the Indian Stock Market, Commodity Market, Currency News, Global Market, Upcoming IPOs, Indian Economy, and more. Get Stock and Share market news, Finance News, Agri Commodity Market, Non-Agri Commodity Market, Sensex, Nifty Live, Commodity Market, IPO news, economy news, personal finance news, Drone News, today only at Moltol India Thu, 01 Feb 2024 04:13:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://moltolindia.com/wp-content/uploads/2025/09/cropped-Moltol-New-Logo-Munafe-ki-baat-32x32.jpeg admin, Author at Moltol India https://moltolindia.com/author/admin/ 32 32 जाम कर देता है केतु का दौर… https://moltolindia.com/ketus-phase-jams/contemplation-of-time/ https://moltolindia.com/ketus-phase-jams/contemplation-of-time/#respond Fri, 26 Jan 2024 09:01:04 +0000 https://moltolindia.com/?p=414 Spread the loveकिसी व्‍यवसायी की कुण्‍डली में केतु की महादशा का दौर बहुत कठिन दौर होता है। चाहे वह महादशा […]

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किसी व्‍यवसायी की कुण्‍डली में केतु की महादशा का दौर बहुत कठिन दौर होता है। चाहे वह महादशा हो, अंतरदशा हो, प्रत्‍यंतर हो या सूक्ष्‍म दशा हो। केतु की दशा के दौरान जो काम जहां होता है, वहीं थमकर रह जाता है। रत्‍ती भर भी आगे नहीं बढ़ता। चाहे कितने भी प्रयास कर लिए जाएं, किसी न किसी अटपटी समस्‍या को लेकर काम अटका हुआ पड़ा रहा है। केतु के पहले बुध का दौर होता है और बाद में शुक्र का। सामान्‍य तौर पर व्‍यापारियों के लिए यह दोनों ग्रह अनुकूल फल देने वाले होते हैं, लेकिन इन दोनों ग्रहों के बीच आती है केतु की दशा जो चलते हुए काम को अटका देती है। खासतौर पर नई योजनाओं और नए प्रोजेक्‍ट्स को यह केतु अधिक कठिनाई देता है।

ज्‍योतिष में केतु को हैडलैस कहा गया है। केतु में बुद्धि नहीं होती, केवल क्रिया होती है। यानी केतु के दौर में जातक काम खूब करता है, सुबह से शाम तक गले तक व्‍यस्‍तताओं में फंसा रहता है, लेकिन उसकी हालत कोल्‍हू के बैल जैसी ही रहती है। शून्‍य से शुरूआत कर पुन: शून्‍य पर आ टिकता है। अगर केतु की महादशा हो, जो कि सात साल तक चलती है, तो यह शून्‍य से शून्‍य तक की दौड़ बार बार होती है, अगर अंतरदशा हो जो कि लगभग एक साल की होती है, तो चक्‍कर कुछ छोटे हो सकते हैं। प्रत्‍यंतरदशा कुछ माह की होती है, इस अवधि में चल रहे काम बिल्‍कुल रूक जाते हैं, बिना किसी ठोस कारण के और सूक्ष्‍म दशा कुछ दिनों की होती है, तब कम्‍युनिकेशन गैप अथवा कागजों की पूर्ति जैसे निरर्थक कार्यों की एवज में काम अटका रहता है।

खराब बात यह है कि केतु अटकाकर रखता है, लेकिन इसी की अच्‍छी बात यह है कि केतु गिराता नहीं है, व्‍यापारी का प्रोफाइल या स्‍टेटस कमोबेश एक जैसा बना रहता है, अगर प्रगति नहीं होती तो गिरावट भी बहुत अधिक नहीं होती है। प्रयास अधिक होते हैं और सभी प्रयास निष्‍फल जाते हैं। केतु के ठीक बाद शुक्र का दौर आता है, चाहे महादशा में हो या सूक्ष्‍म में, तब केतु में किए गए प्रयासों का उचित फल शुक्र में मिलने लगता है, बशर्तें जातक की कुण्‍डली में शुक्र फलदायी स्थिति में विराजमान हो।

इस केतु के लिए सामान्‍यीकृत उपचार संकटमोचक गणपति के पाठ बताए जाते हैं और कुत्‍तों की सेवा करना बताया जाता है। अन्‍य विशिष्‍ट उपचारों के लिए आपको किसी सक्षम ज्‍योतिषी की सलाह लेकर केतु के उपचार करने चाहिए, इससे केतु के दौरान होने वाले तनाव से बचने में मदद मिलती है और गंभीर नुकसान होने से बचा जा सकता है।

सिद्धार्थ जगन्‍नाथ जोशी–+919413156400

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हाइब्रिड म्यूचुअल फंड की ओर मुड़ रहे इंवेस्‍टर्स https://moltolindia.com/investors-turning-towards-hybrid-mutual-funds/stock/mutual-funds/ https://moltolindia.com/investors-turning-towards-hybrid-mutual-funds/stock/mutual-funds/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:48:16 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=213 Spread the loveमुंबई। हाइब्रिड म्यूचुअल फंड योजनाएं निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही हैं और वे इनमें बढ़चढ़कर निवेश […]

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मुंबई। हाइब्रिड म्यूचुअल फंड योजनाएं निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही हैं और वे इनमें बढ़चढ़कर निवेश कर रहे हैं। बीते सात महीनों में निवेशकों ने इन योजनाओंमें 72,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। डेट फंड्स के लिए टैक्सेशन में बदलाव और आर्बिट्रेज कैटेगरी में भारी निवेश से इन योजनओं ने अपनी ओर ध्‍यान खींचा है।

बता दें कि हाइब्रिड म्यूचुअल फंड योजनाएं आमतौर पर इक्विटी और डेट सिक्योरिटीज में और कभी-कभी सोने जैसी अन्य एसेट कैटेगरी में भी निवेश करती हैं। 

डेट फंड्स के लिए इस महीने कराधान में बदलाव के बाद अप्रैल से यह कैटेगरी निवेशको को लुभा रही है। इससे पहले, मार्च में इस सेगमेंट में 12,372 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई थी। भारतीय म्यूचुअल फंड एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में हाइब्रिड स्कीम्स में 9,907 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। अप्रैल-सितंबर में इस कैटेगरी ने 62,174 करोड़ रुपए जुटाएं। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में कुल निवेश 72,081 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इन 72,081 करोड़ रुपए में सबसे अधिक 48,978 करोड़ रुपए आब्रिट्रेज कैटेगरी में आए। 

हाइब्रिड फंड्स मध्यम या कम जोखिम वाले निवेशकों की पसंद हैं। ये फंड अच्छे निवेश विकल्प हैं क्योंकि ये इक्विटी बाजारों में भाग लेने से जुड़ी अस्थिरता को कम करते हैं।  और निश्चित आय बाजार में स्थिरता प्रदान करते हैं। 1 अप्रैल से लागू हुए नए नियमों के तहत तीन साल से अधिक समय तक रखे गए डेट म्यूचुअल फंडों को अब इंडेक्सेशन लाभ नहीं मिलेगा।

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स्विगी की वैल्‍यूएशन बढ़ी, आईपीओ से पहले अच्‍छी खबर https://moltolindia.com/swiggy-valuation-increased-good-news-before-ipo/stock/ipo/ https://moltolindia.com/swiggy-valuation-increased-good-news-before-ipo/stock/ipo/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:47:32 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=210 Spread the loveमुंबई। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी के वैल्यूएशन को अमेरिकी इनवेस्टमेंट फर्म इनवेस्को ने लगातार दूसरी बार बढ़ाया […]

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मुंबई। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी के वैल्यूएशन को अमेरिकी इनवेस्टमेंट फर्म इनवेस्को ने लगातार दूसरी बार बढ़ाया है। इनवेस्को ने स्विगी का वैल्यूएशन बढ़ाकर 8.3 अरब डॉलर आंका है। बता दें कि स्विगी में इनवेस्को की करीब दो प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनवेस्को ने करीब 19.05 करोड़ डॉलर के निवेश से यह हिस्सेदारी खरीदी थी‍ जिससे उसे कंपनी के 28,844 शेयर आबंटित हुए। बता दें कि पूरी स्विगी कंपनी की वैल्यूएशन करीब 8.3 अरब डॉलर बैठती है।

यह लगातार दूसरा मौका है जब इनवेस्को ने स्विगी का वैल्यूएशन बढ़ाया है। पिछले साल अक्टूबर में इनवेस्को ने स्विगी का वैल्यूएशन 42 प्रतिशत बढ़ाकर 7.85 अरब डॉलर किया था। हालांकि, इससे पहले इनवेस्को ने लगातार कई बार स्विगी के वैल्यूएशन को घटाया भी था।

पिछले साल अप्रैल में इनवेस्को ने स्विगी का मूल्यांकन 10.7 अरब डॉलर से घटाकर 8 अरब डॉलर कर दिया था। उसके तुरंत बाद, इनवेस्को ने फिर से स्विगी के मूल्यांकन को घटाया। इसकी वजह से स्विगी का वैल्यूएशन 5.5 अरब डॉलर था। यह जनवरी 2022 में स्विगी की ओर से 10.7 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर इक्‍ठठा किए गए फंडिंग का करीब आधा था।

इनवेस्को ने इस बार स्विगी के वैल्यूएशन में इस बार लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। हालांकि यह अभी भी अपने 10.7 अरब डॉलर के शीर्ष वैल्यूएशन से नीचे है। कंपनी ने इसी वैल्यूएशन पर निवेशकों से 700 अरब डॉलर जुटाए थे और अमेरिकी इनवेस्टमेंट फर्म ने भी इस राउंड में हिस्‍सा लिया था। स्विगी के अन्य निवेशकों में, अमेरिका की बैरन कैपिटल ने भी हाल में कंपनी के वैल्यूएशन में बदलाव किया है। मार्च 2023 में बैरन कैपिटल ने स्विगी की फेयर वैल्यू करीब 40 फीसदी घटाकर 6.5 अरब डॉलर किया था। 

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जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट से चमके आईटी शेयर https://moltolindia.com/it-shares-shine-due-to-jp-morgan-report/stock/stock-market/ https://moltolindia.com/it-shares-shine-due-to-jp-morgan-report/stock/stock-market/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:46:38 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=207 Spread the loveमुंबई। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से दरों में कटौती की उम्मीद […]

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मुंबई। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से दरों में कटौती की उम्मीद के बीच आईटी सैक्टर पर अपने रुख को न्‍यूट्रल कर दिया है। इस फर्म ने इंफोसिस और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के लिए अपनी रेटिंग को अपग्रेड करके ‘ओवरवेट’ कर दिया है, जबकि टीसीएस, एचसीएलटेक, एमफैसिस और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स सहित दूसरी कंपनियों की रेटिंग को ‘अंडरवेट’ से बढ़ाकर ‘न्यूट्रल’ किया है।

इस अपग्रेडिंग की वजह से ज्‍यादातर आईटी कंपनियों के शेयरों में आज तेजी आई है और निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग एक फीसदी से अधिक चढ़ा। बता दें कि वर्ष 2023 में बाजार में आई तेजी के बावजूद आईटी सैक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा है। वैश्विक बाजार के मैक्रोज के कमजोर रहने और ब्याज दरों के ऊंचे स्तरों पर रहने के कारण कंपनियों के आईटी खर्च में कमी आई है। जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर देखने को मिला है। हालांकि ब्याज दरों में उम्मीद से पहले कटौती होने की संभावना और अमेरिका में सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिशों को सफलता मिलने की आशा ने आईटी सैक्टर के शेयरों को चमकाया है।

कई विश्लेषकों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024 के अंत या वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत से ही आईटी कंपनियों की कमाई में पॉजिटिव परिवर्तन देखने को मिलेंगे। सुधार की इन उम्मीदों को देखते हुए विश्लेषकों की निवेशकों को सलाह है कि वे आईटी शेयरों में अब लंबी अवधि के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। 2023 की जोरदार रैली में इन शेयरों के न बढ़ने से ये सस्‍ते हैं और शेयरों का वैल्यूएशन अच्छा लग रहा है।

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डॉलर-रुपए में इस तरह करें आज ट्रेड https://moltolindia.com/trade-in-usd-inr-today-like-this-4-january-2024/currency/ https://moltolindia.com/trade-in-usd-inr-today-like-this-4-january-2024/currency/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:45:31 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=204 Spread the loveमुंबई। डॉलर इंडेक्स ने अपनी बढ़त बरकरार रखी और एक बार फिर 102 अंक को पार कर गया। […]

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मुंबई। डॉलर इंडेक्स ने अपनी बढ़त बरकरार रखी और एक बार फिर 102 अंक को पार कर गया। डॉलर इंडेक्स बुधवार को 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ सकारात्मक नोट पर 102.165 पर बंद हुआ।

USD-INR 29 जनवरी वायदा अनुबंध बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 0.05 फीसदी घटकर 83.3650 पर थोड़ा कमजोर बंद हुआ। बुधवार को जारी फेड दिसंबर मौद्रिक नीति बैठक के मिनटों में फेड दर में कटौती के समय पर कोई स्पष्टता नहीं होने के कारण डॉलर ने बहुत अधिक अस्थिरता दिखाई और अपना लाभ बढ़ाया और 3 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी अंतिम विनिर्माण पीएमआई रीडिंग भी 48.4 की अपेक्षित रीडिंग के मुकाबले घटकर 47.9 हो गई और दिसंबर महीने के लिए निर्माण खर्च भी उम्मीद से कम था। दिसंबर महीने में अमेरिकी निर्माण खर्च 0.6 फीसदी की अपेक्षित वृद्धि के मुकाबले 0.4 फीसदी बढ़ गया और पिछले महीने की 1.2 फीसदी की वृद्धि से काफी कम है। हालांकि, यूएस 10-वर्षीय बांड यील्‍ड अपने उच्चतम स्तर से फिसल गई और यूएस डॉलर के लाभ को सीमित कर सकती है।

हमें उम्मीद है कि इस सप्ताह डॉलर सूचकांक अस्थिर रहेगा और 101.20-102.85 के दायरे में कारोबार कर सकता है। दूसरी ओर, घरेलू इक्विटी बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद रुपया एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने निचले स्तर से उबर गया है। साल 2024 के लिए बेहतर विकास की संभावनाएं और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी से निचले स्तर पर रुपये को सपोर्ट मिला है। हमें उम्मीद है कि डॉलर इंडेक्स में अस्थिरता के बीच इस सप्ताह रुपए में उतार-चढ़ाव रहेगा और एक पेयर 82.8000-83.7000 के दायरे में कारोबार कर सकती है।

तकनीकी दृष्टिकोण: पृथ्‍वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन का कहना है कि USDINR 29 जनवरी के वायदा अनुबंध का कारोबार एक सीमित दायरे में हुआ। दैनिक तकनीकी चार्ट पर एक जोड़ी अपने ट्रेंड-लाइन समर्थन स्तर 83.2000 से ऊपर कारोबार कर रही है और एमएसीडी दैनिक तकनीकी चार्ट पर सकारात्मक मूवमेंट दिखा रहा है। दैनिक तकनीकी चार्ट पर आरएसआई भी 50 के स्तर से ऊपर पहुंच रहा है। दैनिक तकनीकी चार्ट के अनुसार, हमने देखा कि एक पेयर अपने मूविंग एवरेज ट्रेंड-लाइन समर्थन स्तर 83.2000 से ऊपर कारोबार कर रही है और एमएसीडी सकारात्मक मूवमेंट दिखा रहा है। तकनीकी सेट-अप को देखते हुए, आरएसआई 50 के स्तर से ऊपर पहुंच रहा है लेकिन एक पेयर को उच्च स्तर पर तीव्र प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।

दैनिक तकनीकी चार्ट के अनुसार एक पेयर को 83.2000-83.0500 पर समर्थन मिल रहा है जबकि रेजिस्‍टेंस 83.5000-83.7000 पर है। एक पेयर केवल 83.3500 के स्तर से ऊपर बनी रहने पर अपने रेजिस्‍टेंस स्तर 83.5000-83.7000 को टेस्‍ट कर सकती है अन्यथा यह एक बार फिर अपने समर्थन स्तर को टेस्‍ट कर सकती है। हम पेयर में नई स्थिति लेने के लिए 83.2500-83.4500 के स्तरों को करीब से देखने का सुझाव देते हैं; रेंज का दोनों ओर का ब्रेकआउट जोड़ी को आगे की दिशा दे सकता है।

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क्‍या वर्ष 2024 हल्‍दी का होगा..ज्‍वाइन करें वेबिनार https://moltolindia.com/will-2024-be-the-year-of-turmeric-join-the-webinar/webinar/ https://moltolindia.com/will-2024-be-the-year-of-turmeric-join-the-webinar/webinar/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:44:34 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=201 Spread the loveमोलतोल इंडिया की ओर से मंगलवार 6 फरवरी 2024 हल्‍दी पर वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। […]

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मोलतोल इंडिया की ओर से मंगलवार 6 फरवरी 2024 हल्‍दी पर वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। इसमें एक्‍सपर्टस बताएंगे कि क्‍या वर्ष 2024 हल्‍दी में बेहतर रिटर्न का वर्ष होगा। 6 फरवरी को शाम 5 बजे ज्‍वाइन कीजिए यह वेबिनार।

वेबिनार जूम पर होगी। इसका आईडी 841 1526 0032 है और पासवर्ड 12345

जूम मीटिंग का लिंक : https://us05web.zoom.us/j/84115260032?pwd=pFcFNmJPLF6mIaMveGmOcaABwZ86Uk.1

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गेहूं का वैश्विक उत्पादन 78.30 करोड़ टन होने की संभावना https://moltolindia.com/global-wheat-production-likely-to-be-783-million-tonnes/commodity-agri/wheat/ https://moltolindia.com/global-wheat-production-likely-to-be-783-million-tonnes/commodity-agri/wheat/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:42:26 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=198 Spread the loveवाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने अपनी वर्ष 2023-24 की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में गेहूं का उत्‍पादन […]

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वाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने अपनी वर्ष 2023-24 की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में गेहूं का उत्‍पादन बढ़ने की बात कही है लेकिन यह बीते साल के रिकॉर्ड स्‍तर से कम रहेगा। आस्‍ट्रेलिया और कनाडा में गेहूं का उत्‍पादन बढ़ेगा लेकिन यह पूर्व वर्ष की तुलना में क्रमश: 37 और 7 प्रतिशत कम रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कमी भारत, अर्जेंटीना और कज़ाखस्तान में उपज घटने से होगी। गेहूं के वैश्विक स्‍टॉक में बढ़ोतरी की बात कही गई है लेकिन यह वर्ष 2015-16 की तुलना के स्‍तर से कम होगा। यूएसडीए ने वर्ष 2023-24 सीजन के लिए गेहूं के औसत भाव को 10 सेंटस बढाकर 7.30 डॉलर प्रति बुशेल किया है।

यूएसडीए के मुताबिक वर्ष 2023-24 में गेहूं का वैश्विक उत्पादन 78.30 करोड़ टन होने की संभावना है। यह अनुमान नवंबर म‍हीने में 78.19 करोड़ टन था। यह उत्‍पादन वर्ष 2022-23 में 78.96 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 78 करोड़ टन रहा। वर्ष 2023-24 में भारत में गेहूं का उत्पादन 11.05 करोड़ टन रहने का अनुमान है जबकि, यह वर्ष 2022-23 के लिए 10.40 करोड़ टन है।

यूएसडीए ने वर्ष 2023-24 में रुस में 9 करोड़ टन, कज़ाखस्तान में 1.20 करोड़ टन गेहूं का उत्‍पादन होने का अनुमान जताया। अमेरिका में 4.93 करोड़ टन, चीन में 13.70 करोड़ टन, यूरोपीयन संघ में 13.43 करोड़ टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान लगाया है। जबकि, रुस में वर्ष 2022-23 में 9.20 करोड़ टन, कज़ाखस्तान में 1.64 करोड़ टन रहा। अमेरिका में 4.48 करोड़ टन, चीन में 13.77 करोड़ टन, यूरोपीयन संघ में 13.41 करोड़ टन गेहूं की पैदावार हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022-23 में अर्जेंटीना से 46.81 लाख टन, आस्‍ट्रेलिया से 3.23 करोड टन, ब्राजील से 26.89 लाख टन, कनाडा से 2.53 करोड़ टन, यूरोपीयन संघ से 3.50 करोड़ टन, रुस से 4.75 करोड़ टन, यूक्रेन से 1.71 करोड़ टन गेहूं निर्यात हुआ। जबकि, वर्ष 2023-24 में अर्जेंटीना से 95 लाख टन, आस्‍ट्रेलिया से 2.20 करोड टन, ब्राजील से 25 लाख टन, कनाडा से 2.35 करोड़ टन, यूरोपीयन संघ से 3.75 करोड़ टन, रुस से पांच करोड़ टन, यूक्रेन से 1.25 करोड़ टन गेहूं निर्यात होने की संभावना है।

वर्ष 2022-23 में गेहूं की कुल वैश्विक खपत 79.21 करोड़ टन रही जो वर्ष 2023-24 में 79.46 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में गेहूं का वैश्विक अंतिम स्‍टॉक 26.98 करोड़ टन रहा जो वर्ष 2023-24 में 25.82 करोड़ टन रहने की संभावना है। भारत में गेहूं का अंतिम स्टॉक वर्ष 2022-23 में 95 लाख टन रहा जो वर्ष 2023-24 में 1.10 करोड़ टन रहने की संभावना है।

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मक्‍का के वैश्विक उत्‍पादन में मामूली इजाफा होगा : यूएसडीए https://moltolindia.com/there-will-be-a-slight-increase-in-global-production-of-maize-usda/commodity-agri/maize/ https://moltolindia.com/there-will-be-a-slight-increase-in-global-production-of-maize-usda/commodity-agri/maize/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:41:13 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=195 Spread the loveवाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में मार्केटिंग वर्ष 2023-24 में मक्‍का का उत्‍पादन […]

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वाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में मार्केटिंग वर्ष 2023-24 में मक्‍का का उत्‍पादन कुछ बढ़ने की संभावना जताई है। यूक्रेन, रुस, यूरोपीयन संघ और इजिप्‍त में मक्‍का का उत्‍पादन बढ़ेगा जबकि मैक्सिको और कनाडा के उत्‍पादन में कमी आएगी। यूक्रेन और अमेरिका से मक्‍का का निर्यात बढ़ेगा जबकि आयात सबसे ज्‍यादा मैक्सिको का होगा। साथ ही कुछ मध्‍य अमेरिका और उत्तरी अफ्रीकन देश भी आयात अधिक करेंगे। यूएसडीए ने मक्का का औसत दाम वर्ष 2023-24 के लिए 4.85 डॉलर प्रति बुशेल पर कायम रखा है।

यूएसडीए ने दुनिया भर में वर्ष 2023-24 के लिए 122.20 करोड़ टन मक्‍का पैदा होने का अनुमान जताया है। यह अनुमान नवंबर महीने में 122.07 करोड़ टन था। जबकि वर्ष 2022-23 के लिए 115.72 करोड़ टन मक्‍का पैदा होने की संभावना है। जो वर्ष 2021-22 में 121.72 करोड़ टन था।

भारत में मक्‍का का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 343 लाख टन होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2022-23 में 380.85 लाख टन और वर्ष 2021-22 में 337.30 लाख टन रहा। भारत से वर्ष 2023-24 में 34 लाख टन मक्‍का निर्यात होने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 में 31.95 लाख टन और वर्ष 2021-22 में 34.41 लाख टन रहा। भारत में मक्‍का की खपत वर्ष 2023-24 में 312 लाख टन रहने की उम्‍मीद है जो वर्ष 2022-23 में 347 लाख टन रही।

वर्ष 2023-24 में अर्जेंटीना का मक्का निर्यात 3.40 करोड़ टन, अमेरिका का निर्यात 5.40 करोड़ टन और ब्राजील का निर्यात 5.90 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में अर्जेंटीना का मक्का निर्यात 2.57 करोड़ टन, अमरीका का निर्यात 4.28 करोड़ टन और ब्राजील का निर्यात 5.32 करोड़ टन रहा।

यूएसडीए के मुताबिक अमरीका में वर्ष 2023-24 में मक्‍का का उत्‍पादन 38.69 करोड़ टन आंका है जो वर्ष 2022-23 में 34.83 करोड़ टन रहा। चीन में मक्का का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 27.70 करोड़ टन होने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में यह उत्पादन 27.72 करोड़ टन रहा। यूरोपीयन संघ में मक्का का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 6.01 करोड़ टन रह सकता है जो वर्ष 2022-23 में 5.24 करोड़ टन था।

यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार ब्राजील में मक्‍का का उत्पादन वर्ष 2022-23 में 13.70 करोड़ टन रहा। यह वर्ष 2023-24 में 12.90 करोड़ टन रहने की संभावना है। अर्जेंटीना में मक्का का उत्पादन वर्ष 2022-23 में 3.40 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2023-24 में 5.50 करोड़ टन पहुंचने के आसार हैं। दक्षिण अफ्रीका में मक्का का उत्‍पादन वर्ष 2023-24 में 1.68 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 में 1.71 करोड़ टन रहा।

यूक्रेन में मक्का का उत्पादन वर्ष 2022-23 में 2.70 करोड़ टन रहने की उम्‍मीद है जो वर्ष 2023-24 में 3.05 करोड़ टन रहने के आसार हैं। रुस में मक्का का उत्पादन वर्ष 2022-23 में 1.58 करोड़ टन रहने की संभावना है जो वर्ष 2023-24 में 1.70 करोड़ टन पहुंच सकता है। मैक्सिको में मक्‍का का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 2.55 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

मक्‍का की कुल खपत वर्ष 2023-24 में 120.69 करोड़ टन पहुंच सकती है जो वर्ष 2022-23 में 116.76 करोड़ टन रही।

समूची दुनिया में वर्ष 2022-23 में मक्का का अंतिम स्‍टॉक 3 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2023-24 के लिए 3.15 करोड़ टन आंका गया। यह वर्ष 2021-22 में 3.10 करोड़ टन रहा।

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चावल के वैश्विक उत्‍पादन में होगी हल्‍की बढ़ोतरी : यूएसडीए https://moltolindia.com/there-will-be-a-slight-increase-in-global-production-of-rice-usda/commodity-agri/rice/ https://moltolindia.com/there-will-be-a-slight-increase-in-global-production-of-rice-usda/commodity-agri/rice/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:30:47 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=192 Spread the loveवाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने मार्केटिंग वर्ष 2023-24 की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में चावल के वैश्विक […]

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वाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने मार्केटिंग वर्ष 2023-24 की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में चावल के वैश्विक उत्‍पादन अनुमान में थाईलैंड में उपज बढ़ने से बढ़ोतरी जताई है। कुछ अफ्रीकन देशों में इसकी मांग घटने से चावल की खपत में कमी आएगी, हालांकि, भारत में चावल का उपयोग बढ़ेगा। चीन, केन्‍या और नेपाल का चावल आयात घटेगा। चावल का वैश्विक निर्यात कारोबार भारत की वजह से घटेगा।

यूएसडीए का कहना है कि पिछले महीने अमेरिकी चावल का भाव पांच डॉलर बढ़कर 765 डॉलर प्रति टन रहा जबकि उरुग्‍वे का चावल 30 डॉलर बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। यह वर्ष 2019 के बाद पहला मौका है जब उरुग्‍वे के चावल का भाव अमेरिका के भाव से अधिक है। थाईलैंड का चावल 51 डॉलर गिरकर 619 डॉलर, जबकि वियतनाम का चावल 11 डॉलर बढ़कर 687 डॉलर प्रति टन ऑफर हो रहा था। पाकिस्‍तानी चावल 39 डॉलर बढ़कर 589 डॉलर प्रति टन पर ऑफर हो रहा था।

यूएसडीए ने समूचे विश्व में वर्ष 2023-24 में 51.80 करोड़ टन चावल पैदा होने का अनुमान जताया है। यह अनुमान नवंबर में 51.77 करोड़ टन था। वर्ष 2022-23 में यह उत्‍पादन 51.29 करोड़ टन और वष्र 2021-22 में 51.30 करोड़ टन था।

यूएसडीए ने वर्ष 2023-24 में भारत का चावल निर्यात वर्ष 2022-23 के 1.80 करोड़ टन से 1.65 करोड़ टन होने का अनुमान जताया है। यह वर्ष 2021-22 में 2.21 करोड़ टन रहा। भारत का वर्ष 2023-24 में चावल उत्‍पादन 13.20 करोड टन रहने की संभावना है। भारत में वर्ष 2022-23 में 13.57 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 12.94 करोड़ टन चावल पैदा हुआ था।

यूएसडीए ने बांग्‍लादेश में वर्ष 2023-24 में चावल उत्‍पादन 3.64 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में चावल उत्पादन 3.63 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 3.58 करोड़ टन रहा। ब्राजील में चावल का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 74.80 लाख टन, वर्ष 2022-23 में 70.04 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2021-22 में 73.37 लाख टन रहा। अमेरिका में वर्ष 2023-24 में 69.75 लाख टन, वर्ष 2022-23 में 50.92 लाख टन, चीन में 14.59 करोड़ टन की तुलना में 14.90 करोड़ टन, म्यांमार (बर्मा) में 1.18 करोड़ टन से 1.19 करोड़ टन, फिलीपिंस में समान रुप से 1.26 करोड़ टन, इंडोनेशिया में 3.40 करोड़ टन की तुलना में 3.35 करोड़ टन चावल का उत्‍पादन होने का अनुमान है। जबकि, अमेरिका में वर्ष 2021-22 में 60.83 लाख टन, चीन में 14.89 करोड़ टन, म्‍यांमार (बर्मा) में 1.24 करोड़ टन, फिलीपिंस में 1.25 करोड़ टन, इंडोनेशिया में 3.44 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ।

चावल आयात की बात की जाएं तो वर्ष 2023-24 में चीन 33 लाख टन, यूरोपीयन देशों 24 लाख टन, ईरान 11.50 लाख टन, इराक 20 लाख टन, मलेशिया 12 लाख टन, सऊदी अरब 13.50 लाख टन, फि‍लिपींस 38 लाख टन, सेनेगल 14 लाख टन और संयुक्त अरब अमीरात 8.75 लाख टन चावल का आयात कर सकता है। जबकि, वर्ष 2022-23 में चीन 27 लाख टन, यूरोपीयन देशों 24 लाख टन, ईरान 8 लाख टन, इराक 20 लाख टन, मलेशिया 11.50 लाख टन, सऊदी अरब 13 लाख टन, फि‍लिपींस 37.50 लाख टन, सेनेगल 14 लाख टन और संयुक्त अरब अमीरात 8 लाख टन चावल का आयात किया।

चावल की कुल वैश्विक खपत वर्ष 2023-24 में 52.50 करोड टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में यह 52.09 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में यह 51.78 करोड़ टन रही। वर्ष 2023-24 में चावल का वैश्विक अंतिम स्‍टॉक 16.77 करोड़ टन रहने का अनुमान है। जबकि, वर्ष 2022-23 में चावल का वैश्विक अंतिम स्‍टॉक 17.47 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में यह 18.27 करोड़ टन रहा। भारत में वर्ष 2023-24 में 3.25 करोड़ टन चावल का अंतिम स्‍टॉक रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2022-23 में भी 3.50 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 3.40 करोड़ टन रहा।

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कॉटन के वैश्विक उत्‍पादन में मामूली कटौती की यूएसडीए ने https://moltolindia.com/usda-makes-slight-cut-in-global-cotton-production/commodity-agri/cotton/ https://moltolindia.com/usda-makes-slight-cut-in-global-cotton-production/commodity-agri/cotton/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:29:32 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=189 Spread the loveवाशिंग्‍टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने अपनी दिसंबर महीने की रिपोर्ट में कॉटन के वैश्विक उत्‍पादन अनुमान में […]

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वाशिंग्‍टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने अपनी दिसंबर महीने की रिपोर्ट में कॉटन के वैश्विक उत्‍पादन अनुमान में कमी की आशंका जताई है। टर्की, अमेरिका और मैक्सिको में कपास के उत्‍पादन में कमी आएगी, हालांकि, पाकिस्‍तान में उत्‍पादन बढ़ने से इसकी भरपाई हो सकेगी। चीन, अमेरिका, टर्की और मैक्सिको में उपयोग घटने से कॉटन की वैश्विक खपत में कमी आएगी। कॉटन के वैश्विक ट्रेड में स्थिरता रहेगी। हालांकि, अंतिम स्‍टॉक में थोड़ी बढ़ोतरी होगी। यूएसडीए ने वर्ष 2023-24 के लिए कॉटन का औसत भाव 77 सेंटस प्रति पाउंड पर स्थिर रखा है।

यूएसडीए ने मार्केटिंग वर्ष 2023-24 (अगस्‍त-जुलाई) में कॉटन का वैश्विक उत्‍पादन 2.45 करोड़ टन रहने का अनुमान आंका है जबकि पिछले महीने यह अनुमान 2.47 करोड़ टन था। वर्ष 2022-23 में यह 2.53 करोड़ टन आंका गया। वर्ष 2021-22 में 2.49 करोड़ टन कॉटन का उत्‍पादन रहा। गांठ में बात की जाए यह उत्पादन अनुमान वर्ष 2023-24 में 11.29 करोड़ गांठ, 2022-23 के लिए 11.66 करोड़ गांठ आंका है जबकि वर्ष 2020-21 के लिए 11.45 करोड़ गांठ था।

यूएसडीए के मुताबिक वर्ष 2023-24 में भारत का कॉटन उत्पादन अनुमान 54.43 लाख टन आंका है। भारत में वर्ष 2022-23 के लिए यह 57.26 लाख टन था। वर्ष 2021-22 में कॉटन उत्‍पादन 52.91 लाख टन था। यूएसडीए ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत में कॉटन की घरेलू खपत वर्ष वर्ष 2023-24 के लिए 52.25 लाख टन आंकी है जो 2022-23 में 51.17 लाख टन आंकी गई। वर्ष 2021-22 में कॉटन की घरेलू खपत 54.43 लाख टन थी।

भारत का वर्ष 2023-24 में कॉटन का अंतिम स्‍टॉक अनुमान 26.83 लाख टन आंका है जो वर्ष 2022-23 में 25.74 लाख टन रहा। वर्ष 2021-22 में 18.28 लाख टन कॉटन का स्‍टॉक था। भारत से कॉटन का निर्यात वर्ष 2023-24 में 3.92 लाख टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में यह निर्यात 2.39 लाख टन रहा। भारत से वर्ष 2021-22 में 8.15 लाख टन कॉटन का निर्यात हुआ। भारत का कॉटन आयात वर्ष 2023-24 में 2.83 लाख टन रहने की संभावना है जो वर्ष 2022-23 में 3.76 लाख टन रहा। यह आयात वर्ष 2021-22 में 2.18 लाख टन रहा।

पाकिस्‍तान में वर्ष 2023-24 में कॉटन उत्‍पादन 14.59 लाख टन रहने का अनुमान है। यह वर्ष 2022-23 में 8.49 लाख टन होने का अनुमान है जो 2021-22 में 13.06 लाख टन रहा। पाकिस्तान के वर्ष 2023-24 में 8.71 लाख टन और वर्ष 2022-23 में 9.80 लाख टन कॉटन आयात करने की संभावना है जो वर्ष 2021-22 में भी 9.80 लाख टन रहा। पाकिस्‍तान की कॉटन की घरेलू खपत वर्ष 2023-24 में 21.77 लाख टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 में 18.94 लाख टन रहने का अनुमान है। यह वर्ष 2021-22 में 23.30 लाख टन थी। ब्राजील में वर्ष 2023-24 में 31.70 लाख टन और वर्ष 2022-23 में 25.52 लाख टन कॉटन पैदा होने का अनुमान है। जबकि वर्ष 2021-22 में 23.56 लाख टन कॉटन पैदा हुई थी। अमेरिका में वर्ष 2023-24 में 27.82 लाख टन (पिछले महीने 28.50 लाख टन) और 2022-23 में 31.50 लाख टन कॉटन की उपज होने का अनुमान है। यह उपज वर्ष 2021-22 में 38.15 लाख टन रही। चीन में वर्ष 2023-24 में 58.79 लाख टन और वर्ष 2022-23 में 66.84 लाख टन कॉटन उत्‍पादन का अनुमान है। यह वर्ष 2021-22 में 58.35 लाख टन थी। टर्की में वर्ष 2023-24 में 6.97 लाख टन और वर्ष 2022-23 में 10.67 लाख टन कॉटन पैदा होने का अनुमान है। जबकि, अन्य देशों में कॉटन का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 40.45 लाख टन और वर्ष 2022-23 में 41.04 लाख टन होने की संभावना है जो वर्ष 2021-22 में 42.36 लाख टन रहा।

वर्ष 2023-24 में ब्राजील का कॉटन निर्यात 25.04 लाख टन, अमेरिका का 26.56 लाख टन, आस्‍ट्रेलिया का 12.30 लाख टन रहने का अनुमान है। जबकि, वर्ष 2022-23 में ब्राजील से कॉटन निर्यात 14.49 लाख टन, अमेरिका से 27.79 लाख टन, आस्‍ट्रेलिया से 13.43 लाख टन रहने की संभावना है। चीन का कॉटन आयात वर्ष 2023-24 में 23.95 लाख टन रहने की संभावना है जो वर्ष 2022-23 में 13.57 लाख टन रहने का अनुमान है। बांग्लादेश का आयात मार्केटिंग वर्ष 2023-24 में 16.33 लाख टन, वर्ष 2022-23 में 15.24 लाख टन, वियतनाम का आयात वर्ष 2023-24 में 14.59 लाख टन, वर्ष 2022-23 में 14.09 लाख टन का अनुमान है। पाकिस्तान वर्ष 2023-24 में 8.71 लाख टन कॉटन आयात कर सकता है जो वर्ष 2022-23 में 9.80 लाख टन रहने की संभावना है। इंडोनेशिया वर्ष 2023-24 में 5.01 लाख टन कॉटन का आयात कर सकता है जो वर्ष 2022-23 में 3.62 लाख टन रहने का अनुमान है।

चीन का अंतिम स्टॉक वर्ष वर्ष 2023-24 में 84.50 लाख टन और वर्ष 2022-23 में 81.43 लाख टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2023-24 में ब्राजील में 12.05 लाख टन कॉटन का अंतिम स्‍टॉक रह सकता है जो वर्ष 2022-23 में  12.53 लाख टन रहने का अनुमान है। समूची दुनिया का फसल वर्ष वर्ष 2023-24 के लिए अंतिम स्‍टॉक 179.40 लाख टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 के लिए 180.35 लाख टन रह सकता है। यह वर्ष 2021-22 में 166.21 लाख टन था।

दुनिया भर में वर्ष 2023-24 में 320.1 लाख हैक्टेयर में कपास की खेती होने का अनुमान है। यह खेती 2022-23 में 317.5 लाख हैक्टेयर और 2021-22 में 323.3 लाख हैक्‍टेयर में हुई। भारत में कपास का बुवाई अनुमान वर्ष 2023-24 में 127 लाख हैक्‍टेयर में रहने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 में 129.3 लाख हैक्टेयर में रही। जबकि, वर्ष 2021-22 में 123.7 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।

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सोयाबीन के वैश्विक उत्‍पादन में मामूली कमी संभव : यूएसडीए https://moltolindia.com/slight-reduction-in-global-soybean-production-possible-usda/commodity-agri/oilseeds/ https://moltolindia.com/slight-reduction-in-global-soybean-production-possible-usda/commodity-agri/oilseeds/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:26:58 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=186 Spread the loveवाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में वैश्विक तिलहन उत्पादन वर्ष 2023-24 में मामूली […]

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वाशिंग्टन। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की दिसंबर महीने की रिपोर्ट में वैश्विक तिलहन उत्पादन वर्ष 2023-24 में मामूली घटकर 6610 लाख टन रहने का अनुमान जताया है। यह कटौती ब्राजील में सोयाबीन के उत्‍पादन में कमी की आशंका की वजह से की गई है। हालांकि, इसकी भरपाई आस्‍ट्रेलिया और कनाडा में रेपसीड की उपज से होगी। सोयाबीन और सनफ्लावर के अंतिम स्‍टॉक में कमी के बावजूद रेपसीड के कैरी आउट की वजह से अंतिम स्‍टॉक कुछ बढ़ेगा। यूएसडीए ने सोयाबीन का औसत दाम वर्ष 2023-24 के लिए 12.90 डॉलर प्रति बुशेल पर कायम रखा है।

यूएसडीए ने वर्ष 2023-24 में समूची दुनिया में सोयाबीन का उत्‍पादन नवंबर महीने के अनुमान 40.04 करोड़ टन से घटकर 39.88 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है। सोयाबीन का उत्‍पादन वर्ष 2022-23 में 37.43 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में यह 36.04 करोड़ टन था। वर्ष 2023-24 में अमेरिका में सोयाबीन उत्पादन 11.23 करोड़ टन आंका है जो वर्ष 2022-23 में 11.62 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 12.15 करोड़ टन था। ब्राजील में वर्ष 2023-24 में सोयाबीन उत्‍पादन 16.10 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 में 16 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 13.05 करोड़ टन था।

अर्जेंटीना में सोयाबीन का उत्पादन वर्ष 2023-24 में 4.80 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2022-23 में 2.50 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में यह 4.39 करोड़ टन था। चीन में सोयाबीन का उत्‍पादन वर्ष 2023-24 में 2.05 करोड़ टन रहने की संभावना है जो वर्ष 2022-23 में 2.02 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 1.63 करोड़ टन रहा। यूएसडीए का कहना है कि वर्ष 2023-24 में चीन का सोयाबीन आयात 10.20 करोड़ टन रहने की संभावना है। यह आयात वर्ष 2022-23 में भी 10.08 करोड़ टन रहा।

यूएसडीए ने अपनी रिपोर्ट में वर्ष 2023-24 में ब्राजील का सोयाबीन निर्यात वर्ष 2022-23 के 9.55 करोड़ टन की तुलना में 9.95 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया है। अमरीका का सोयाबीन निर्यात अनुमान वर्ष 2023-24 में 4.77 करोड़ टन रहने के आसार है जबकि वर्ष 2022-23 में यह 5.42 करोड़ टन रहा। अर्जेंटीना का 2023-24 में सोयाबीन निर्यात 46 लाख टन रहने की संभावना है। यह वर्ष 2022-23 में 41.85 लाख टन रहा। पेरुग्वे का 2023-24 में सोयाबीन निर्यात 60 लाख टन रहने की संभावना है। यह वर्ष 2022-23 में 58 लाख टन रहा।

अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक भारत में वर्ष 2023-24 में सोयाबीन का उत्‍पादन 110 लाख टन रहने का अनुमान जताया है। यह उत्‍पादन वर्ष 2022-23 में 124.11 लाख टन था जबकि वर्ष 2021-22 में 118.89 लाख टन रहा। भारत में वर्ष 2023-24 में 95 लाख टन सोयाबीन क्रश होने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में 103 लाख टन और वर्ष 2021-22 में 85 लाख टन सोयबीन का क्रशिंग हुआ।

समूची दुनिया में वर्ष 2023-24 में सोयाबीन का अंतिम स्टॉक 11.42 करोड़ टन रहने का अनुमान है। सोयाबीन का अंतिम स्‍टॉक वर्ष 2022-23 में 10.19 करोड़ टन और वर्ष 2021-22 में 9.79 करोड़ टन रहा।

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जीवन बीमा पॉलिसी पर ऋण कैसे लें https://moltolindia.com/how-can-get-loan-against-life-insurance-policy/investment/insurance/ https://moltolindia.com/how-can-get-loan-against-life-insurance-policy/investment/insurance/#respond Sat, 13 Jan 2024 13:22:18 +0000 http://www.pravegnews.in/moltolindia/?p=183 Spread the loveसबसे पहली बात कि आपका आकस्मिक फंड यानि की आकस्मिक रकम हमेशा आपके पास तैयार होनी चाहिए, जो […]

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सबसे पहली बात कि आपका आकस्मिक फंड यानि की आकस्मिक रकम हमेशा आपके पास तैयार होनी चाहिए, जो कि आपके बचत खाते से जुड़े मियादी जमा के रूप में होनी चाहिए। या फिर किसी म्‍युचुअल फंड में जो कि बहुत उतार चढ़ाव वाला न हो, क्योंकि आजकल म्‍युचुअल फंड से भी आपको पैसा मात्र 24 घंटों में ही आपके खाते में जमा हो जाता है।

अब आते हैं सवाल की और कि क्या अपने जीवन बीमा में भरने वाली रकम पर ऋण ले सकता हूं, जी हां अगर आपका जीवन बीमा एन्डोमेंट पॉलिसी है तो आप जीवन बीमा के लिए जमा की गई रकम के विरूद्ध ऋण ले सकते हैं। बैंक आपकी जीवन बीमा कंपनी की पॉलिसी को लेगा और उस पर ऋण लिया गया है, का स्वत्व लगवा कर जीवन बीमा कंपनी को निर्देशित कर देगा। और आपको एक डिमांड लोन याने कि मांग ऋण दे देगा। कई बैंके इस ऋण को अधविकर्ष खाता यानि कि ओवरड्रॉफ्ट भी कहते हैं।

इस ऋण की वजह से आप अपनी जीवन बीमा पॉलिसी सरेंडर नहीं कर पाएंगे, जब तक कि आप पूरा पैसा बैंक को जमा नहीं करवा देते और अपनी पॉलिसी को बैंक के स्वत्व से छुड़ा नहीं लेते।

आजकल तो कई जीवन बीमा कंपनियां खुद भी अपनी एन्डोमेंट पॉलिसी के विरूद्ध ऋण दे देती हैं।

जीवन बीमा पॉलिसी के विरूद्ध लिए गए ऋण पर हर बैंक का अपना अलग ब्याज दर हो सकता है। और वैसे ही कितनी रकम वे आपको ऋण देंगे, ये बैंक ही आपको बताएगा, अगर जीवन बीमा कंपनी से ऋण लेते हैं तो वहां प्रोसेस सरल है और आसानी से ऋण मिल जाता है। हां, थोड़ी ब्याज दर ज्यादा हो सकती है।

ध्यान रखें कि जीवन बीमा पॉलिसी पर ऋण तभी मिलेगा जब कि आपकी जीवन बीमा पॉलिसी एन्डोमेंट है, अगर टर्म इंश्‍योरेंस है तो आपको आपकी जीवन बीमा पॉलिसी पर कोई ऋण नहीं मिलेगा, क्योंकि टर्म बीमा में कोई सरेंडर वैल्यू नहीं होती है। अगर मनी बैक पॉलिसी है और अगर कोई पेमेंट आनी है तो बीमा कंपनी उस मनी बैक को अपने ऋण में जमा कर लेगी। वह रकम ग्राहक को नहीं दी जाएगी, क्योंकि उस जीवन बीमा पॉलिसी पर ऋण चल रहा है।

ऋण लेने के बावजूद आपका जीवन बीमा चलता रहेगा, अगर जीवन को किसी भी प्रकार का आघात लगता है तो नामांकित व्यक्ति को अपना दिया गया ऋण की रकम काटकर जीवन बीमा कंपनी पैसा दे देती है।

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